हिमाचल प्रदेश: नशे का सफाया, 90 सरकारी कर्मचारियों पर होगी सख्त कारवाई
हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ सुक्खू सरकार का बड़ा कदम
शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे के बढ़ते कारोबार और विशेषकर 'चिट्टे' की समस्या को खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश में नशे के खिलाफ एक निर्णायक युद्ध की घोषणा की है। इस मुहिम के तहत नशे की गतिविधियों में संलिप्त पाए गए 90 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सरकार का यह कदम शुचिता और नशे के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को दर्शाता है।
कम शब्दों में कहें तो, हिमाचल प्रदेश की सरकार ने नशे की समस्या के खिलाफ कठोर कदम उठाया है और 90 सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी की तैयारी की जा रही है। इस फैसले का उद्देश्य नशे के कारोबार पर कड़ा नियंत्रण लगाना है। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Nainital Samachar
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
सचिवालय में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि नशा तस्करों और इसमें सहायता करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले ही 21 पुलिस कर्मचारियों को नशे के मामलों में संलिप्तता के कारण बर्खास्त किया जा चुका है। अब अन्य विभागों के 90 कर्मचारियों की बर्खास्तगी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री का मानना है कि जब तक व्यवस्था में बैठे सफेदपोश मददगारों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक नशे की चेन को तोड़ना कठिन है।
युवाओं के भविष्य के लिए नई पहल
राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों के तहत, युवाओं को नशे की गर्त से बचाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों के लिए कई नए नियम बनाए गए हैं। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, इंजीनियरिंग स्कूलों, और अन्य महाविद्यालयों में छात्रों की 'चिट्टे' के लिए अनिवार्य जांच की जाएगी। यदि कोई छात्र नशे का आदी पाया जाता है, तो उसे पुनर्वास केंद्र में भेजा जाएगा। इसके अतिरिक्त, सभी सरकारी भर्तियों में अब ड्रग टेस्ट की रिपोर्ट पेश करना अनिवार्य किया गया है।
एनडीपीएस एक्ट की प्रभावशीलता
हिमाचल प्रदेश में कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए पिट एनडीपीएस (PIT NDPS) एक्ट का सहारा लिया जा रहा है। पंचायत स्तर पर नशे के हॉटस्पॉट मैपिंग की गई है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। अब शिक्षण संस्थानों के लिए भी इसी तर्ज पर मैपिंग की जाएगी। मुख्यमंत्री ने जिला स्तर के अधिकारियों का प्रदर्शन नशे के खिलाफ उनके ठोस कदमों के आधार पर आंका जाएगा।
जन-आंदोलन की दिशा में कदम
नशा मुक्ति अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए 1 जून से 20 अगस्त तक 'चिट्ठा मुक्त हिमाचल' के दूसरे चरण की शुरुआत की जाएगी। इस दौरान प्रदेश की 234 रेड जोन घोषित पंचायतों और शिक्षण संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इन कार्यक्रमों में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, तस्करों की अवैध संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जा रही है। अब तक 12 संपत्तियों को जब्त किया गया है और एक और संपत्ति पर कार्रवाई की जा रही है।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश सरकार ने नशे के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज करते हुए यह संदेश दिया है कि वह इस समस्या को समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान में पूरे प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी को शामिल किया गया है। इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करना और युवाओं का भविष्य सुरक्षित बनाना है।
अब देखना यह है कि यह योजना कितनी सफल होती है और क्या दूसरे राज्य भी इससे प्रेरणा लेंगे। For more updates, visit Nainital Samachar
इस लेख को लिखा है: प्रिया रावत, टीम निनताल समाचार
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0