ईरान: होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट के बाद वैकल्पिक तेल मार्गों की खोज

Apr 24, 2026 - 08:30
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ईरान: होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट के बाद वैकल्पिक तेल मार्गों की खोज
ईरान: होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट के बाद वैकल्पिक तेल मार्गों की खोज

ईरान: होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट के बाद वैकल्पिक तेल मार्गों की खोज

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कम शब्दों में कहें तो, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति गंभीर रूप से बाधित हो गई है। इस पृष्ठभूमि में, मध्य पूर्व के देश अब नए विकल्पों की तलाश में जुट गए हैं।

नई दिल्ली। हाल के दिनों में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का प्रभाव विश्व ऊर्जा बाजार पर बड़े पैमाने पर पड़ा है। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है, अब संकट के दौर से गुजर रहा है। इस स्थिति ने मिडिल ईस्ट के देशों के लिए तेल और गैस निर्यात के विकल्पों को सीमित कर दिया है, जिससे उन्हें नए मार्गों की तलाश में मजबूर होना पड़ा है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इस संकट को अब तक का सबसे बड़ा आपूर्ति संकट करार दिया है। 1970 के दशक के ऐतिहासिक तेल संकट और हाल के रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हुई गैस आपूर्ति बाधा से भी यह संकट अधिक गंभीर माना जा रहा है। इस खतरे को देखते हुए, खाड़ी देश अब होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करने के पुराने और नए वैकल्पिक रास्तों पर अपनी निर्भरता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

वर्तमान वैकल्पिक तेल मार्ग

वर्तमान स्थिति में सऊदी अरब की 1200 किलोमीटर लंबी ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ सबसे प्रमुख विकल्प है। यह पाइपलाइन प्रतिदिन लगभग 70 लाख बैरल तेल परिवहन करने में सक्षम है, हालाँकि वर्तमान में केवल 45 लाख बैरल तेल का ही निर्यात हो पा रहा है। यह तेल यनबू बंदरगाह तक पहुँचता है, जहाँ से इसे एशिया और यूरोप के बाजारों में पहुँचाया जाता है।

इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात की 360 किलोमीटर लंबी हबशान-फुजैराह पाइपलाइन भी एक महत्वपूर्ण विकल्प है। हालाँकि, हाल के ड्रोन हमलों ने इसकी सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।

इराक-तुर्की और ईरान के पथ

इसी क्रम में, इराक-तुर्की के बीच की किर्कुक-जेहान पाइपलाइन को ढाई साल के लंबे अंतराल के बाद पुनः चालू किया गया है, जिसे वर्तमान में 1.7 लाख बैरल तेल रोजाना भेजा जा रहा है। इसके माध्यम से भंडारण की क्षमता को 2.5 लाख बैरल तक बढ़ाने की योजना भी है।

ईरान भी ‘गोरेह-जास्क पाइपलाइन’ परियोजना पर काम कर रहा है, जिसकी क्षमता 10 लाख बैरल प्रतिदिन है। जास्क टर्मिनल अभी तैयार नहीं है, लेकिन 2024 में यहाँ से ट्रायल शिपमेंट किया जा चुका है।

भविष्य की योजनाएँ - नए मार्गों की संभावना

भविष्य के बारे में विचार करते हुए, इराक अब ओमान के दूक्म बंदरगाह तक नई पाइपलाइन बनाने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा, इराक से जॉर्डन के अकाबा बंदरगाह तक एक पाइपलाइन बनाने का प्रस्ताव भी लंबित है, जिसका लक्ष्य 10 लाख बैरल प्रति दिन की क्षमता है। लेकिन उच्च लागत और सुरक्षा कारणों से ये प्रोजेक्ट अभी तक रुक गए हैं।

इसी प्रकार, एक विशाल वैकल्पिक विचार खाड़ी से ओमान सागर तक एक नई नहर बनाने का भी है, लेकिन इसके लिए हजर पर्वतमाला को काटना और स्वेज नहर जैसी संरचना तैयार करना आर्थिक और भौगोलिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

इन सब पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, यह स्पष्ट है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट ने मध्य पूर्व के देशों को वैकल्पिक मार्गों की खोज में जुटने को मजबूर किया है। वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता को बनाये रखने के लिए नए मार्गों का विकास अत्यधिक आवश्यक हो गया है।

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सादर,

टीम नैनीताल समाचार, संजना शर्मा

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