खेत बचाओ अभियान से किसानों को जागरूक कर रहीं डॉ. सुनीता बौराई, प्राकृतिक खेती को मिल रहा नया जोश

Jun 21, 2026 - 08:30
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खेत बचाओ अभियान से किसानों को जागरूक कर रहीं डॉ. सुनीता बौराई, प्राकृतिक खेती को मिल रहा नया जोश
खेत बचाओ अभियान से किसानों को जागरूक कर रहीं डॉ. सुनीता बौराई, प्राकृतिक खेती को मिल रहा नया जोश

खेत बचाओ अभियान से किसानों को जागरूक कर रहीं डॉ. सुनीता बौराई, प्राकृतिक खेती को मिल रहा नया जोश

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कम शब्दों में कहें तो, डॉ. सुनीता बौराई किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक कर रही हैं, जिससे कृषि उत्पादों की बाजार में मांग बढ़ रही है।

देहरादून। डॉ. सुनीता बौराई इस समय विभिन्न एफपीओ (Farmer Producer Organizations) के साथ मिलकर किसानों को आवश्यक जानकारी और संसाधन प्रदान कर रही हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के शुरू किए गए “खेत बचाओ अभियान” के तहत उनका प्रयास है कि किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को अपनाएं। यह जागरूकता किसानों की आय बढ़ाने और उनकी जीवनस्तर को ऊंचा उठाने के लिए महत्वपूर्ण है।

डॉ. बौराई का मानना है कि यदि भारतीय किसान संतुलित मात्रा में उर्वरक, दवाइयाँ और प्राकृतिक संसाधन जैसे गोबर की खाद का उपयोग करें, तो इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि लागत भी कम होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण के लिए भी बेहतर है और यह भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में सहायक है।

इस पहल के अंतर्गत, प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त का वितरण भी किया। यह योजना अंततः किसानों को उनकी कृषि गतिविधियों में वित्तीय समर्थन प्रदान करती है। इस दौरान, मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस कार्यक्रम का वर्चुअल माध्यम से प्रसारण देखा और किसानों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह कार्यक्रम किसानों के सम्मान, समृद्धि और सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका मानना है कि केंद्र सरकार की किसान हितैषी योजनाएं किसानों के आय में वृद्धि और कृषि क्षेत्र के विकास में सहायक हैं। इस दौरान राज्यसभा सांसद नैरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर और बड़ी संख्या में किसान और कृषि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

इस प्रकार, डॉ. सुनीता बौराई के नेतृत्व में किसानों को संवर्धनीय कृषि की दिशा में जागरूक करने का कार्य निश्चित रूप से आगे बढ़ रहा है। उनके प्रयासों से न केवल किसानों का आर्थिक विकास हो रहा है, बल्कि वे आधुनिकता और परंपरा का संतुलन भी बनाए रखने में सक्षम हो रहे हैं।

इससे यह साफ होता है कि यदि किसान अपने पुराने तरीकों को छोड़कर नए कृषि तकनीकों को अपनाते हैं, तो न केवल उनकी खुद की दशा बदल सकती है, बल्कि यह देश की कृषि क्षेत्र में भी स्थायी परिवर्तन ला सकता है।

इस बीच, स्थानीय प्रशासन एवं कृषि विभाग भी इस अभियान का समर्थन कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें। हम सभी को इस दिशा में सतर्क रहना होगा और एकजुट होकर कृषि की चुनौतियों का सामना करना होगा।

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संपादक: नैना कर्णवाल, टीम नैनीताल समाचार

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