शिक्षाविद बीएन कुकरेती का देहदान: अमरता की नई परिभाषा
शिक्षाविद बीएन कुकरेती का देहदान: अमरता की नई परिभाषा
ऋषिकेश, 22 जुलाई 2026। जीवनभर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं देने वाले बीएन कुकरेती ने अपनी अंतिम सांस के बाद भी मानवता को एक नई दिशा दिखाई है। भरत मंदिर इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त शिक्षक रहे श्री कुकरेती ने अपनी जीवन यात्रा में न केवल शिक्षा का प्रकाश फैलाया, बल्कि अपनी मृत्यु के बाद भी एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनके पार्थिव शरीर को एम्स ऋषिकेश को चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए समर्पित कर दिया गया है। साथ ही, उनके कॉर्निया भी निकालकर दो जरूरतमंद लोगों को आंखों की रोशनी दिलाने का प्रबंध किया गया है।
कम शब्दों में कहें तो, श्री बीएन कुकरेती के द्वारा किया गया देहदान उन सभी के लिए प्रेरणा है जो मानवता की सेवा के प्रति सजग रहते हैं। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें.
शिक्षा के क्षेत्र में योगदान
श्री बीएन कुकरेती ने 30 जून 1996 को सेवानिवृत्त होने के बाद भी समाज और विद्यार्थियों के बीच अनुशासन, नैतिकता, और चरित्रवान जीवन जीने की प्रेरणा का दीप जलाए रखा। उनके पुत्र शैलेश कुकरेती ने बताया कि पिता ने 3 जून 2024 को देहदान का संकल्प पत्र भरा था। यही नहीं, उन्होंने अपने परिवार से अपनी इच्छा जताई थी कि उनकी मृत्यु के उपरांत उनका शरीर चिकित्सा के उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाए।
देहदान की प्रक्रिया
उनकी मृत्यु के बाद, परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए एम्स ऋषिकेश के एनाटॉमी विभाग में देहदान की प्रक्रिया को पूर्ण किया। यह एम्स में कुल 104वां देहदान था, और यह प्रक्रिया चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
एम्स का दृष्टिकोण
इस अवसर पर एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि देहदान न केवल एक बड़ा दान है बल्कि यह मानवता की सेवा का एक महत्वपूर्ण कार्य भी है। यह आने वाली पीढ़ियों के डॉक्टरों को बेहतर प्रशिक्षण देने में सहायक होता है।
प्रेरणादायक संदेश
एनाटॉमी विभाग के प्रमुख डॉ. मुकेश सिंगला और अन्य चिकित्सा अधिकारियों ने भी इस प्रक्रिया में भाग लिया। डॉ. राजू बोकन ने बताया कि देहदान के दौरान दोनों कॉर्निया को सुरक्षित निकालकर नेत्र बैंक में जमा किया गया है, जिससे दो जरूरतमंद लोगों को नई दृष्टि प्राप्त होगी।
श्री बीएन कुकरेती का यह निर्णय समाज के लिए यह प्रेरणादायक संदेश दे रहा है कि मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का मार्ग खुला रहता है।
इस प्रकार, बीएन कुकरेती न केवल एक शिक्षा के पथप्रदर्शक रहे, बल्कि वे मानवता के प्रति अपने अनूठे योगदान के माध्यम से अमर हो गए हैं।
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सादर,
टीम नैनिताल समाचार
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