मणिपाल हॉस्पिटल द्वारा किडनी रोगियों को सशक्त बनाने के लिए डायलिसिस पेशेंट समिट का आयोजन
मणिपाल हॉस्पिटल ने किडनी रोगियों को जागरूकता एवं सहयोग के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए डायलिसिस पेशेंट समिट का आयोजन किया
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कम शब्दों में कहें तो: मणिपाल हॉस्पिटल ने किडनी रोगियों के लिए एक डायलिसिस पेशेंट समिट आयोजित किया, जिससे मरीजों को जागरूकता और सहायता प्रदान करने का लक्ष्य है।
देहरादून – आज के समय में क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) एक बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है, जिसमें दुनियाभर में लाखों लोग पीड़ित हैं। इसके पीछे मुख्य कारण है देर से निदान और जागरूकता की कमी, जिसके चलते हज़ारों लोग जीवनभर डायलिसिस पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, मणिपाल हॉस्पिटल ने किडनी रोगियों के लिए डायलिसिस पेशेंट समिट का आयोजन किया।
यह समिट मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी की एक विशेष पहल है, जिसमें 50 से अधिक डायलिसिस मरीज, डायलिसिस की प्रतीक्षा कर रहे लोग, किडनी प्रत्यारोपण प्राप्त कर चुके मरीज और उनके देखभालकर्ताओं ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को एक साझा मंच पर समग्र जानकारी उपलब्ध कराना और अनुभव साझा करने के लिए अवसर प्रदान करना था।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अर्घ्य मजूमदार, एडवाइज़र एवं वरिष्ठ सलाहकार, नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग तथा डॉ. उपल सेनगुप्ता, निदेशक एवं क्लिनिकल लीड, नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग, मणिपाल हॉस्पिटल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बस्तब घोष, सलाहकार यूरोलॉजिस्ट भी शामिल हुए।
समिट की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, इसके बाद किडनी स्वास्थ्य पर एक इंटरैक्टिव पैनल चर्चा आयोजित की गई। इस दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों ने किडनी रोग से जुड़ी आम भ्रांतियों को दूर किया, समय पर निदान का महत्व बताया और डायलिसिस तथा किडनी प्रत्यारोपण में हुई नवीनतम प्रगति पर चर्चा की।
विशेषज्ञों ने जीवनशैली में बदलाव, संतुलित पोषण और उपचार का नियमित पालन करने के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी चर्चा की, जिन्हें क्रॉनिक किडनी डिजीज के प्रभावी प्रबंधन के लिए आवश्यक समझा गया।
इसके अतिरिक्त, मरीजों के लिए विशेष इंटरएक्शन कियोस्क स्थापित किए गए, जिनके माध्यम से प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं पर चर्चा की और व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार समग्र परामर्श प्राप्त किया। कार्यक्रम को और भी भावनात्मक एवं प्रेरणादायक बनाने के लिए एक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें मरीजों ने अपने उपचार के दौरान किए गए संघर्षों और आशाओं की कहानियां साझा कीं।
समुदाय के सक्रिय सदस्यों ने इस अवसर पर सम्मानित किया गया, जिनमें शांतनु चटर्जी, सुसांत गांगुली, पारस शर्मा, प्रोजेश कुमार घोष, मलोया तलापात्रा, सार्थक दास और डॉ. काबेरी चौधुरी शामिल थे।
कार्यक्रम में डॉ. अर्घ्य मजूमदार ने कहा, "क्रॉनिक किडनी डिजीज के बोझ को देखते हुए, मरीजों में जागरूकता बढ़ाना और रोकथाम संबंधी उपायों को मजबूत करना बेहद आवश्यक हो गया है। यह केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मरीजों के लिए एक नया जीवन जीने का अवसर है।"
डॉ. उपल सेनगुप्ता ने इस सम्मेलन में बताया, "हर वर्ष भारत में दो लाख से अधिक लोग एंड-स्टेज किडनी डिजीज से प्रभावित होते हैं। इसलिए, समय पर उपचार और किडनी प्रत्यारोपण के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।"
बैरकपुर के रहने वाले 52 वर्षीय सरकारी कर्मचारी और किडनी प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ता श्री अरूप कुमार दास ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "मेरा जीवन अचानक बदल गया था जब मुझे किडनी फेल होने का निदान हुआ था, लेकिन डॉक्टरों के सही मार्गदर्शन और सहयोग से मैं अब पूर्ण रूप से सक्रिय जीवन जी रहा हूँ।"
वरिष्ठ अधिवक्ता श्री प्रद्युम्न सिन्हा ने भी अपनी यात्रा साझा की और कहा, "डॉक्टर ने मुझे फिर से जीने का मौका दिया। इस कार्यक्रम ने मुझे डायलिसिस और किडनी प्रत्यारोपण से जुड़े डर को दूर करने में मदद की।"
हॉस्पिटल डायरेक्टर श्री दिलीप कुमार रॉय ने कहा, "किडनी रोग का निदान केवल मरीज को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करता है। रोगियों को सही जानकारी, सहयोग और आत्मविश्वास प्राप्त होना चाहिए। इस समिट के माध्यम से हमारा प्रयास है कि हम मरीजों को एक सफल और सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करें।"
समिट का समापन एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें मरीजों और उनके देखभालकर्ताओं को विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिला। इस अनूठे कार्यक्रम ने मणिपाल हॉस्पिटल की किडनी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की प्रतिबद्धता को फिर से स्थापित किया।
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टीम नैनीताल समाचार (सुरभि शर्मा)
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