उत्तराखंड: नदियों और पारंपरिक जल स्रोतों को मिलेगा नया जीवन, बारानी कृषि के लिए 187 करोड़ का वित्तीय पैकेज
उत्तराखंड: नदियों और पारंपरिक जल स्रोतों को मिलेगा नया जीवन, बारानी कृषि के लिए 187 करोड़ का वित्तीय पैकेज
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कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड सरकार ने जल संरक्षण और कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण योजनाओं को लागू करने के लिए 187 करोड़ रुपये का वित्तीय पैकेज मंजूर किया है।
देहरादून। उत्तराखंड की राज्य सरकार ने जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और कृषि विकास की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में हुई स्प्रिंग और रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी (SARA) व उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना (UCRRFP) की उच्चस्तरीय बैठकों में इन योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
इन बैठकों में केंद्रीय विषयों में प्रदेश के जल स्रोतों का पुनर्जीवन, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में कृषि को अधिक टिकाऊ बनाना शामिल था। मुख्य सचिव ने विशेष रूप से देहरादून के सॉन्ग नदी और उत्तरकाशी की कमल नदी से संबंधित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आदेश दिए कि इन नदियों के कमजोर क्षेत्रों की पहचान की जाए और सुधार की दिशा में जल्दी कार्रवाई की जाए।
मुख्य सचिव ने उल्लेख किया कि इन पहलों के प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन IIT रुड़की जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से कराना आवश्यक है। यह सुनिश्चित करेगा कि पुनर्निर्माण की प्रक्रिया प्रभावी और संरक्षित हो।
पारंपरिक जल स्रोतों की वृद्धि: मुख्य सचिव ने सभी जिलों को निर्देश दिए कि वे अपने क्षेत्रों के पौराणिक जल स्रोतों और धारों का भी विश्लेषण करें। उन्होंने कहा कि पारंपरिक जल स्रोतों का उपचार करके उनकी संवेदनशील संरचना को भी बचाना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही जल संरक्षण के कार्यों को बढ़ाने के लिए 'कैम्पा फंड' का उपयोग करने का सुझाव दिया गया है।
बारानी कृषि का विकास: बारानी कृषि को बढ़ावा देने के लिए 'उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना' (UCRRFP) की हाई पावर कमेटी ने 2026-27 के वित्तीय वर्ष के लिए 187.11 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना को मंजूरी दी है। इसके अलावा, 2025-26 के लिए 62.19 करोड़ रुपये की संशोधित योजना को भी स्वीकृति दी गई है।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस परियोजना का लाभ गांवों तक पहुंचना चाहिए और इसे केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए ताकि ग्रामीण समुदाय बेहतर आजीविका के लिए सक्षम हो सकें।
बैठकों में परियोजना संचालन के लिए विभिन्न गाइडलाइन्स और वित्तीय प्रबंधन मैनुअल को भी अनुमोदित किया गया। इन महत्वपूर्ण बैठकों में सचिव दिलीप जावलकर, सी रविशंकर, अपर सचिव हिमांशु खुराना, अपूर्वा पांडेय और अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
सरकार के ये निर्णय न केवल उत्तराखंड की पारिस्थितिक स्थिरता को बनाए रखेंगे, बल्कि पहाड़ की आर्थिकी और जल सुरक्षा के लिए भी दूरगामी प्रभाव डालेंगे।
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सादर,
राधिका शर्मा,
टीम Nainital Samachar
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