महिला अधिवक्ता के मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न के मामले में केशव थलवाल पर मुकदमा दर्ज
महिला अधिवक्ता के मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न के मामले में केशव थलवाल पर मुकदमा दर्ज
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कम शब्दों में कहें तो, एक महिला अधिवक्ता ने केशव थलवाल के खिलाफ मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया है। आरोप है कि उसने महिला के झूठे वीडियो सोशल मीडिया पर प्रचारित कर उसे सामाजिक तौर पर बदनाम करने की धमकी दी है।
उत्तराखण्ड के कोतवाली नगर क्षेत्र में एक महिला अधिवक्ता ने केशव थलवाल नामक व्यक्ति के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि थलवाल ने अपनी कमजोरी का नाटक करते हुए महिला अधिवक्ता का विश्वास हासिल किया और उसके साथ कई बार आर्थिक धोखाधड़ी की।
महिला अधिवक्ता विशेष रूप से सक्षम (specially abled) हैं और उनकी पहचान को एक फेसबुक पेज "जागो उत्तराखण्ड" के माध्यम से हुई। वहां केशव थलवाल खुद को पीड़ित बताते हुए जनसहानुभूति प्राप्त करने में सफल रहा। पहले कॉलेज के मित्रों के द्वारा अपनी आर्थिक स्थिति और पुलिस प्रताड़ना का बहाना बनाकर, उन्होंने महिला से आर्थिक सहायता मांगी। हालाँकि, जब महिला ने अपनी राशि वापस मांगी, तो थलवाल ने उसे अपमानित करते हुए धन वापस करने से इंकार कर दिया और उसे उसकी निजी तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी।
केशव एक विवादित व्यक्ति के रूप में सामने आया, जिसने अपनी पहचान को लेकर कई झूठे दावे किए। उनके मित्रों को कथित तौर पर बताया गया कि महिला अधिवक्ता उनकी गर्लफ्रेंड हैं और उससे शादी करने का दबाव बनाया गया। साथ ही अपने समर्थकों से उसने कहा कि यदि महिला ने शादी नहीं की, तो वह उसके खिलाफ बदनाम करने का काम करेगा।
महिला अधिवक्ता को लगातार मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। 3 मई 2026 को, उनके मोबाइल पर त्रिलोक नकोटी नामक व्यक्ति से कॉल आया, जिसने थलवाल द्वारा आत्महत्या की कोशिश करने की बात कही। उसने महिला पर यह आरोप भी लगाया कि वो थलवाल के इस कदम के लिए जिम्मेदार हैं, और लगातार उसे शादी के लिए मजबूर किया गया।
महिला अधिवक्ता ने कोतवाली नगर पुलिस थाने में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि उनके खिलाफ झूठी जानकारी फैलाई जा रही है। पुलिस ने इन आरोपों पर कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी (एफआईआर) क्रमांक 183/2026 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले की आगामी विवेचना चल रही है।
यह मामला केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह इस समाज में मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक शोषण का एक उदाहरण है। महिलाओं के खिलाफ इस प्रकार के उत्पीड़न को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। इस मामले में क्या उचित कार्रवाई होती है, यह देखने वाली बात होगी।
महिला अधिवक्ता अपने कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई जारी रखेंगी, और उम्मीद करती हैं कि न्याय मिल पाएगा। इसके साथ ही, उन्हें अपनी सुरक्षा और सम्मान की आवश्यकता है। ऐसे मामलों को सार्वजनिक करना न केवल पीड़ितों को समर्थन देता है बल्कि समाज में जागरूकता भी बढ़ाता है।
इसके अलावा, इस मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि होने के बाद ही उचित न्यायिक कदम उठाए जाएंगे। हम चाहते हैं कि सभी लोगों को इससे सबक मिले और सच्चाई के साथ आगे बढ़ें। इस प्रकार के मामलों में समाज को एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है।
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Team Nainital Samachar
सर्वेश्वरी देवी
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