महिला आरक्षण की दिशा में ठोस कदम: मुख्यमंत्री धामी ने सांसदों को लिखा पत्र, सहमति की रणनीति बनाई
महिला आरक्षण की दिशा में ठोस कदम: मुख्यमंत्री धामी ने सांसदों को लिखा पत्र, सहमति की रणनीति बनाई
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 16 अप्रैल को संसद में प्रस्तावित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सहमति बनाने के लिए सभी सांसदों और राजनीतिक दलों के प्रदेश अध्यक्षों को पत्र लिखा है।
देहरादून| 13| 04| 2026
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आगामी 16 अप्रैल को संसद में प्रस्तुत होने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर एक विशेष सत्र से पहले राज्य के सांसदों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रदेश अध्यक्षों को पत्र भेजकर महिला आरक्षण के मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। उनके पत्र में उन्होंने संसद में सक्रिय भागीदारी के लिए आग्रह किया है।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का महत्व
मुख्यमंत्री ने पत्र में बताया कि 16 अप्रैल से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। यह सत्र हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और देश के आधी आबादी को निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में समावेश करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। उन्होंने अपने विचार में कहा कि "एक समावेशी समाज का निर्माण तभी संभव है जब महिलाएँ समान अवसरों के साथ आगे बढ़ें और नेतृत्व की भूमिका निभाएं।" आज की युवा पीढ़ी, चाहे वह स्पेस, स्पोर्ट्स, सशस्त्र बलों, या स्टार्ट-ups के क्षेत्रों में हो, सभी में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रही हैं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का महत्व
मुख्यमंत्री धामी ने यह भी कहा कि 2023 में सभी राजनीतिक दलों के सांसदों ने इस अधिनियम का समर्थन किया था, जो भारतीय लोकतंत्र की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसके क्रियान्वयन को लेकर सभी दलों ने यह महसूस किया कि इसके प्रावधानों को जल्द से जल्द लागू करने की आवश्यकता है। इस अधिनियम को लागू करने का समय अब आ गया है, जिससे 2029 के लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के प्रावधानों के आधार पर संपन्न होंगे। इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में नई ऊर्जा का संचार होगा।
उत्तराखंड में महिला आरक्षण की पारंपरिक भावना
उत्तराखंड में यह कदम और भी महत्वपूर्ण बनता है, क्योंकि राज्य ने हमेशा मातृशक्ति को सम्मान देने की परंपरा को बनाए रखा है। पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाएं परिवार और सामुदायिक जीवन की महत्वपूर्ण आधारशिला रही हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम उत्तराखंड की उन बेटियों के लिए नए अवसरों के दरवाजे खोलेगा जो राजनीति, समाज सेवा, शिक्षा, उद्यमिता और सार्वजनिक जीवन में सक्रियता से भाग ले रही हैं।
महिला नेतृत्व का प्रभाव
राज्य में पंचायती राज संस्थाओं, नगर निकायों और सहकारी संस्थाओं में महिला आरक्षण के सफल क्रियान्वयन ने सक्षम महिला नेतृत्व की एक सशक्त पंक्ति तैयार की है। मुख्यमंत्री धामी ने यह विश्वास व्यक्त किया कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करेगी, बल्कि समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को और अधिक संवेदनशीलता से समझने में भी मददगार होगी।
सहमति की दिशा में प्रयास
मुख्यमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर व्यापक सहमति स्थापित करने का अनुरोध किया है, यह कहते हुए कि यह सिर्फ किसी एक दल या व्यक्ति का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश की माताओं, बहनों और बेटियों के सम्मान के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और सशक्त भविष्य से जुड़ा है। इस ऐतिहासिक परिवर्तन को साकार करना हम सभी की जिम्मेदारी है और हमें नारी शक्ति को वह सम्मान और अवसर प्रदान करना चाहिए जिसकी वे हकदार हैं।
सबसे अधिक इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है कि सांसद इस पहल में किस तरह से योगदान दे सकते हैं, ताकि महिलाओं को सशक्त करने के इस प्रयास को सही दिशा मिल सके। For more updates, visit Nainital Samachar.
सादर,
Team Nainital Samachar - Priya Verma
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