दिल्ली: नक्सलवाद समाप्ति और आदिवासियों अधिकारों पर संसद में गरमागरम बहस, अमित शाह ने साझा की उपलब्धियाँ

Mar 31, 2026 - 08:30
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दिल्ली: नक्सलवाद समाप्ति और आदिवासियों अधिकारों पर संसद में गरमागरम बहस, अमित शाह ने साझा की उपलब्धियाँ

दिल्ली: नक्सलवाद समाप्ति और आदिवासियों अधिकारों पर संसद में गरमागरम बहस

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कम शब्दों में कहें तो, सोमवार को लोकसभा में नक्सलवाद और वामपंथी उग्रवाद के मुद्दे पर तीखी बहस हुई। गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा के दौरान पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए देश की पिछले कुछ वर्षों में हुई सफलता और उपलब्धियों के बारे में बताया।

दिल्ली। लोकसभा में नक्सलवाद और वामपंथी उग्रवाद पर चर्चा करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने बड़े और पुराने मुद्दों का स्थायी समाधान किया है। अमित शाह ने मनमोहन सिंह के वक्त की उस टिप्पणी का जिक्र किया जिसमें उन्होंने माओवाद को देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था। लेकिन, उस समय बावजूद कड़े कदम उठाने में विफलता रही। शाह के अनुसार, 2014 के बाद से देश में अभूतपूर्व बदलाव आ रहा है, जिसमें अनुच्छेद 370 का खात्मा, 35A का हटना, राम मंदिर निर्माण, जीएसटी की स्थापना और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण शामिल हैं।

आदिवासियों की असली आवाज

अमित शाह ने यह भी उल्लेख किया कि आज पहली बार आदिवासियों की वास्तविक आवाज संसद तक पहुंची है। उन्होंने आदिवासी जनप्रतिनिधियों से सवाल किया कि उन्होंने स्वयं के विकास के लिए क्या किया है। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी इस अवसर का उपयोग करते हुए केंद्र की नीतियों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करना है।

कंगना ने कांग्रेस पार्टी पर आदिवासियों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया और कहा कि 1967 से जिन समस्याओं ने जन्म लिया, वह समय रहते रोका जा सकता था। उन्होंने कहा कि उग्रवादियों ने हजारों हमले किए हैं और बच्चों को किताबों के बजाय बंदूक देने का काम किया है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की समर्पण नीति के तहत 8000 से अधिक युवा हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं।

पप्पू यादव का दृष्टिकोण

इस बीच, सांसद पप्पू यादव ने इस मुद्दे पर अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किया और आदिवासियों के अधिकार और हिस्सेदारी की वकालत की। उन्होंने कहा कि सिर्फ सुरक्षा बल भेजने से नक्सलवाद खत्म नहीं होगा, बल्कि अन्याय और असमानता को समाप्त करना आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि कार्बन क्रेडिट से प्राप्त आय का सीधा लाभ ग्राम सभाओं को होना चाहिए।

पप्पू यादव ने यह ज़ोर देकर कहा कि आदिवासी युवाओं को उनकी मातृभाषा में एआई, कोडिंग और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों की शिक्षा दी जानी चाहिए। इसके साथ ही, आदिवासियों को खनन और उद्योगों में केवल विस्थापित करने के बजाय उन्हें शेयरधारक बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका मानना था कि जब तक आदिवासियों को उनके जल, जंगल और जमीन पर असली अधिकार और सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक नक्सलवाद की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।

आगे की राह

पूरी चर्चा के दौरान, नक्सलवाद के खात्मे के विभिन्न रणनीतियों और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर विस्तृत विमर्श देखने को मिला। सरकार ने स्पष्ट किया कि अब देश की दिशा बंदूक के बल से नहीं बल्कि संविधान और कानून से चलेगी। इस पूरे प्रसंग ने न केवल राजनीतिक बहस को जीवंत किया, बल्कि आदिवासियों के अधिकारों पर भी एक नई रोशनी डाली है।

आगे बढ़ते हुए, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आदिवासी लोग न केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें, बल्कि समाज के विकास में भी सक्रिय भागीदार बनें।

अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक करें.

संपर्क: टीम नैनिताल समाचार, स्नेहा शर्मा

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