होमस्टे चला रहे पत्रकार को ढाई साल से नहीं मिला पानी, शिकायत के बाद थमाया ₹92 हजार का बिल

Mar 19, 2026 - 08:30
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होमस्टे चला रहे पत्रकार को ढाई साल से नहीं मिला पानी, शिकायत के बाद थमाया ₹92 हजार का बिल

पौड़ी गढ़वाल
उत्तराखंड में रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दिल्ली के बड़े मीडिया संस्थानों में 15 साल तक काम करने के बाद अपने गांव लौटे एक पत्रकार को पिछले ढाई वर्षों से पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
लैंसडोन तहसील के ग्राम पाली तल्ली निवासी सूर्या बड़थ्वाल ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2023 में राज्य सरकार की दीन दयाल होमस्टे योजना से प्रेरित होकर पर्यटन विभाग की मदद और बैंक ऋण से अपने गांव में होमस्टे शुरू किया। उनका उद्देश्य स्वरोजगार के साथ अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करना था।

🚱 ढाई साल में कई आवेदन, फिर भी नहीं मिला पानी

सूर्या बड़थ्वाल के अनुसार, उन्होंने सितंबर 2023 से अब तक पेयजल कनेक्शन के लिए कई बार आवेदन किया। “हर घर नल जल योजना” के तहत भैरव गढ़ी पेयजल योजना से कनेक्शन की मांग की गई, लेकिन विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

💰 शिकायत के बाद थमाया ₹92,784 का बिल

पीड़ित का आरोप है कि 25 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बाद 19 फरवरी 2026 को जल निगम कोटद्वार द्वारा ₹92,784 का बिल थमा दिया गया। साथ ही कहा गया कि बिना भुगतान के कनेक्शन नहीं मिलेगा।
उन्होंने इसे “बदले की भावना से की गई कार्रवाई” बताते हुए कहा कि सामान्य घरेलू कनेक्शन के लिए इतनी बड़ी राशि का कोई औचित्य नहीं है।

⚠ अधिकारियों पर गंभीर आरोप

सूर्या बड़थ्वाल ने जल निगम के अधिशासी अभियंता अजय बेलवाल और जेई शाहदत अली पर मनमानी, घूसखोरी और लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सीएम पोर्टल पर भी अधिकारियों ने गलत रिपोर्ट देकर यह दर्शाया कि भवन निर्माणाधीन है, जबकि वे वर्ष 2022 से उसी भवन में रह रहे हैं।

🏠 होमस्टे और रोजगार पर संकट

पानी के अभाव में होमस्टे संचालन प्रभावित हो रहा है, जबकि बैंक लोन की किस्तें लगातार चल रही हैं। उन्होंने कहा कि “गांव लौटकर रोजगार शुरू करने का फैसला अब गलत साबित होता दिख रहा है।”

📉 रिवर्स माइग्रेशन पर उठे सवाल

उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रशासनिक उदासीनता से पहाड़ लौटने की सोच रखने वाले युवाओं का मनोबल टूट रहा है। “जब मेरे साथ ऐसा हो सकता है, तो आम ग्रामीणों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है,” उन्होंने कहा।

📨 जनप्रतिनिधियों को भेजे पत्र

पीड़ित ने इस मामले में सांसद, विधायक, विधानसभा अध्यक्ष, जिलाधिकारी और संबंधित विभागों को भी पत्र भेजे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।

 

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