पौड़ी में वन्यजीवों का आतंक: 24 घंटे में दूसरी मौत, बाघ के हमले में महिला की जान गई
पौड़ी में वन्यजीवों का आतंक: 24 घंटे में दूसरी मौत, बाघ के हमले में महिला की जान गई
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कम शब्दों में कहें तो पौड़ी जनपद में वन्यजीवों के हमले से स्थिति बुरी तरह बिगड़ गई है, जहां एक ही दिन में दो लोगों की मौत हो चुकी है। इस बार एक 61 वर्षीय महिला उर्मिला देवी को बाघ ने अपना शिकार बना लिया।
पौड़ी जनपद के जयहरीखाल ब्लॉक के सीरोबाड़ी गांव में शुक्रवार की शाम यह दर्दनाक हादसा हुआ। उर्मिला देवी खेतों के पास चारापत्ती लेने गई थीं। जब वह देर तक घर नहीं लौटी, तब गांव वालों ने उन्हें खोजने की कोशिश की और अंततः उनका शव खेतों के पास मिला।
घटना की सूचना मिलने के बाद विधायक लैंसडौन दिलीप रावत और वन विभाग के अधिकारी घटना स्थल पर पहुंचे। लेकिन गांव के लोगों ने शव उठाने से मना कर दिया और इस पर विरोध जताया, जिससे गांव में रोष बढ़ गया। यहां तक कि देर रात तक ग्रामीण धरने पर बैठे रहे।
इससे पहले गुरुवार के दिन पौड़ी के चवथ पट्टी क्षेत्र के गजल्ड गांव में एक और भयावह घटना घटी। 42 वर्षीय राजेंद्र प्रसाद नौटियाल को गुलदार ने तब मार डाला जब वह मंदिर में दीपक जलाकर लौट रहे थे। सुबह करीब साढ़े सात बजे ये हमला हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए और विधायक एवं डीएम का घेराव कर विरोध जताने लगे।
गुलदार के हमलों के खतरे को देखते हुए शिक्षा विभाग ने एहतियातन तय किया है कि क्षेत्र के 48 स्कूलों और सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में शनिवार तक छुट्टी घोषित कर दी गई है। यह निर्णय इलाके की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया है।
जानकारों का मानना है कि ये घटनाएं वन्यजीवों और मानव बस्तियों के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाती हैं। पिछले कुछ वर्षों में वन्यजीवों का आतंक बढ़ा है, जिसके चलते स्थानीय लोग हमेशा चिंता में रहते हैं। बाघों और गुलदारों के हमलों ने क्षेत्रवासियों की सुरक्षा पर सवाल उठाया है।
इतिहास को देखते हुए, वन्यजीवों के हमलों के मामलों में वृद्धि तब होती है जब जंगलों में उनकी प्राकृतिक शिकार की कमी हो जाती है। इससे उनके लिए मनुष्यों का शिकार करना आसान हो जाता है। इसलिए यह आवश्यक हो गया है कि प्रशासन इस समस्या का समाधान खोजे और villagers को जागरूक करे।
अधिकारी विशेष ध्यान दें कि क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ मानव सुरक्षा का ध्यान रखते हुए उचित उपाय करें। ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है।
इस आतंक से प्रभावित क्षेत्रों में जन जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान भी चलाए जा सकते हैं। आम लोगों को यह जानना जरूरी है कि वन्यजीवों के साथ संघर्ष से बचने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
किसी भी सुरक्षा व्यवस्था या जानकारी के लिए, कृपया आधिकारिक विभाग से संपर्क करें। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। सभी को अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए और प्रशासन से सहयोग करना चाहिए।
अंत में, हम सभी से निवेदन करते हैं कि ऐसी घटनाओं के बारे में विचार करें और एक-दूसरे का समर्थन करें। समस्याओं की जड़ों को समझना और उनका सामना करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
टीम नैनिताल समाचार
सुषमा शर्मा
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