दिल्ली: वायुसेना की शक्ति में वृद्धि, 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मिली मंजूरी

Feb 13, 2026 - 08:30
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दिल्ली: वायुसेना की शक्ति में वृद्धि, 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मिली मंजूरी
दिल्ली: वायुसेना की शक्ति में वृद्धि, 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मिली मंजूरी

दिल्ली: वायुसेना की शक्ति में वृद्धि, 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मिली मंजूरी

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कम शब्दों में कहें तो, भारत ने अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसके अंतर्गत 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई है।

नई दिल्ली। भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी सैन्य शक्ति और हवाई सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। रक्षा खरीद परिषद (डीएससी) ने हाल ही में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को अपनी हरी झंडी दे दी है। इस सौदे की अनुमानित लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये है। इस डील पर औपचारिक वार्ता का शीघ्र ही आरंभ होना अपेक्षित है, जिसमें भारतीय अधिकारी और डासॉल्ट एविएशन के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

वायुसेना की गंभीर स्थिति

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब भारतीय वायुसेना लड़ाकू विमानों की भारी कमी का सामना कर रही है। भारतीय वायुसेना के पास स्वीकृत स्क्वाड्रन की संख्या 42 होनी चाहिए, लेकिन पुरानी विमानों के रिटायर होने के कारण यह संख्या वर्तमान में केवल 29 रह गई है। हाल ही में, सितंबर में वायुसेना ने अपने पुराने मिग-21 बेड़े को पूरी तरह से सेवामुक्त कर दिया है। इसके अतिरिक्त, मिग-29, जगुआर और मिराज 2000 जैसे अन्य विमानों के रिटायर होने की संभावनाएं बनी हुई हैं। ऐसे में, पड़ोसी देशों के साथ मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों और बढ़ते तनाव को देखते हुए, वायुसेना के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को तेज करना अनिवार्य हो गया है।>नए राफेल विमानों के संग्रह से वायुसेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

सुरक्षा के साथ आर्थिक पहल

यह रक्षा सौदा केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम को भी नई दिशा देगा। इस समझौते के अंतर्गत कुछ विमानों का निर्माण सीधे फ्रांस से किया जाएगा, जबकि शेष विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। यह भारतीय कंपनियों के लिए डासॉल्ट एविएशन के साथ सहयोग का बड़ा अवसर है। इसके बावजूद, भारत स्वदेशी तेजस विमानों के निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है, जहां हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को 180 तेजस मार्क-1ए का ऑर्डर दिया गया है। हालांकि, जीई एयरोस्पेस की इंजन सप्लाई से जुड़ी समस्याओं के कारण इसकी डिलीवरी में देरी हो रही है।

पूर्व के अनुभव

भारत ने 2016 में फ्रांस से 36 राफेल जेट भी खरीदे थे, जो वर्तमान में पूरी तरह से सक्रिय हैं और अपनी क्षमताओं को साबित कर चुके हैं। राफेल की उन्नत तकनीक और लड़ाकू क्षमता से भारतीय वायुसेना संतुष्ट है, यही कारण है कि नए बेड़े के लिए भी राफेल को प्राथमिकता दी गई है। यह नया सौदा न केवल भारत की हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाएगा, बल्कि रक्षा क्षेत्र में घरेलू उत्पादन और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी नई गति प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का यह निर्णय भारतीय रक्षा तैयारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने की संभावना है।

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सादर,
टीम नैनीताल समाचार, प्रिया शर्मा

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