चमोली स्कूल में भालू की दहशत, शिक्षकों और छात्रों ने मिलकर बचाई मासूम की जान

Dec 23, 2025 - 08:30
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चमोली स्कूल में भालू की दहशत, शिक्षकों और छात्रों ने मिलकर बचाई मासूम की जान
चमोली स्कूल में भालू की दहशत, शिक्षकों और छात्रों ने मिलकर बचाई मासूम की जान

चमोली स्कूल में भालू की दहशत, शिक्षकों और छात्रों ने मिलकर बचाई मासूम की जान

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के चमोली जिले में एक भालू ने जूनियर हाईस्कूल हरिशंकर में घुसकर एक बच्चे को उठाकर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन शिक्षकों और बच्चों की बहादुरी से उसकी जान बच गई।

चमोली। यह घटना सोमवार सुबह की है जब पोखरी विकासखंड स्थित जूनियर हाईस्कूल हरिशंकर में एक जंगली भालू अचानक स्कूल परिसर में घुस आया।
स्कूल में पढ़ाई चल रही थी कि तभी कक्षा 6 का छात्र आरव भालू के हमले का शिकार बना। भालू ने उसे पकड़कर करीब 200 मीटर दूर झाड़ियों की ओर ले जाने में सफल रहा। जैसे ही भालू को देखते ही बच्चे डर कर कक्षाओं में छिप गए, वहीं कुछ बच्चे चिल्लाने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भालू ने एक कक्षा का दरवाजा तोड़ने की भी कोशिश की।

भालू द्वारा बच्चे को पकड़ने का प्रयास

जैसे ही यह घटना हुई, कक्षा 8 की छात्रा दिव्या ने साहस दिखाते हुए शोर मचाया और अन्य बच्चों व शिक्षकों को स्थिति से अवगत कराया। शिक्षकों और छात्रों ने मिलकर भालू के पीछे दौड़ने का साहस किया, जिससे भालू ने आरव को झाड़ियों में छोड़ दिया। आरव को तुरंत बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर लाया गया।

धमकी के बावजूद हिम्मत दिखाई

आरव के शरीर पर भालू के नाखूनों के निशान पाए गए और उसके कपड़े भी फट गए थे। गनीमत रही कि समय पर सहायता मिलने से उसकी जान बच गई। यह घटना सुनकर स्कूल के अन्य छात्र-छात्राओं में डर और चिंता का माहौल बन गया और कई बच्चे रोते हुए नजर आए।

पिछले हमले से आक्रोशित ग्रामीण

अजीब बात यह है कि दो दिन पहले भी इसी स्कूल के एक छात्र पर भालू ने हमला किया था। अब स्कूल परिसर में इस प्रकार का भालू का घुसना ग्रामीणों और अभिभावकों के बीच में भारी आक्रोश पैदा कर रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों के लोग स्कूल पहुंचे। अध्यापक उपेन्द्र सती ने बताया कि शिक्षक हमेशा स्कूल में मौजूद रहते हैं, इसके बावजूद यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

वन विभाग की मुहिम

भालू के आतंक के बीच राज्य सरकार कई क्षेत्रों में एहतियाती कदम उठा रही है। जौलीग्रांट के थानो वन रेंज अंतर्गत पहाड़ी क्षेत्रों में एक टीम बनाई गई है, जो भालू संभावित इलाकों में बच्चों को स्कूल छोड़ने और महिलाओं को जंगल तक ले जाने में मदद कर रही है।

सुरक्षा उपायों की आवश्यकताएं

वन विभाग ने भालू संभावित क्षेत्रों में सोलर लाइटें लगाई हैं, साथ ही भालुओं को पकड़ने के लिए पिंजरे भी स्थापित किए गए हैं। इसके बावजूद, भालू की घटनाएं नहीं थम रही हैं, जिससे ग्रामीणों के मन में चिंता बनी हुई है।

ग्रामीणों की चिंताएं

स्कूलों और आवासीय क्षेत्रों में वन्यजीवों की पहुंच ने प्रशासन के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि स्कूलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थायी उपाय किए जाएं, नियमित गश्त की जाए और भालुओं को पकड़ने के लिए तुरंत कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।

भालू के हमलों के बढ़ते प्रकरणों के नए दृष्टिकोण के साथ, यह आवश्यक है कि सरकार और वन विभाग अपनी रणनीतियों को सुधारें ताकि बच्चों और आवासीय क्षेत्रों को सुरक्षित रखा जा सके।

इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ ना हो।

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Team Nainital Samachar

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