कुत्ते के काटने पर इलाज न कराना बना गंभीर समस्या

Mar 15, 2026 - 08:30
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कुत्ते के काटने पर इलाज न कराना बना गंभीर समस्या

कुत्ते के काटने पर इलाज न कराना बना गंभीर समस्या

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कम शब्दों में कहें तो एक छोटी सी भूल के कारण एक किशोर की जिंदगी危険 में पड़ गई है। चार महीने पहले कुत्ते के काटने के बाद टीकाकरण की प्रक्रिया अधूरी छोड़ने का परिणाम भयंकर साबित हुआ है। अब किशोर कुत्तों की तरह भौंकने लगा है, जो कि स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

भाईलाल के बेटे का यह मामला तब सामने आया जब परिवार ने उसे सुरक्षित मानकर टीकाकरण का कोर्स अधूरा छोड़ दिया। किशोर की हालत इतनी गंभीर हो गई है कि वह अपनी पहचान खो चुका है। वह आठवीं कक्षा का छात्र है और ज़िंदगी के ऐसे मोड़ पर आ गया है, जहां नियमित जीवन जीने की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है।

कुत्ते के काटने का मामला

जानकारी के अनुसार, भाईलाल का बेटा चार महीने पहले अपने ननिहाल गया था, जहां एक आवारा कुत्ते ने उसे काट लिया। उस समय परिवार ने बच्चे को ननिहाल में पहला इंजेक्शन दिया और दूसरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में। लेकिन इसके बाद आवश्यक चार इंजेक्शन लगवाने में लापरवाही बरती गई, जिससे वायरस उसकी बॉडी में फैल गया।

मंदिर में घटित घटना

यह घटना तब तूल पकड़ गई जब दिव्यांग पिता अपने बेटे को आस्था के प्रतीक हनुमान मंदिर और श्री राम जानकी मंदिर लेकर गए। वहां उन्होंने कुत्ते की तरह भौंकते देख कंपित होकर मदद की गुहार लगाई। स्थानीय लोगों ने तुरंत एम्बुलेंस बुलवाकर किशोर को अस्पताल पहुंचाया।

डॉक्टरी सलाह और चेतावनी

कछवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉक्टर पंकज पांडेय ने बताया कि यह हाइड्रोफोबिया की स्थिति है। टीकाकरण की कमी से वायरस मस्तिष्क पर असर डालने लगा है। किशोर की सांस की नली सिकुड़ने के कारण उसकी आवाज कुत्ते जैसी हो गई है। इसके अलावा, उसे पानी से भी डर लगने लगा है, जो कि रेबीज का सबसे गंभीर लक्षण है।

व्यवहार में बदलाव

सिर्फ आवाज में ही नहीं, किशोर के चलने और बैठने के तरीके में भी भारी बदलाव आ गया है। वह इंसानों की तरह चलने की बजाय जानवरों की तरह हरकतें करने की कोशिश कर रहा है। विस्तार से कहा जाए तो परिवार की एक छोटी सी चूक ने किशोर की जिंदगी को अत्यंत कठिन बना दिया है, जिससे वापसी संभव नहीं दिखती। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रेबीज के लक्षण दिखने के बाद बचने की संभावना बेहद कम होती है।

टीकाकरण की अनदेखी - सबक

डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के काटने पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन का पूरा कोर्स अनिवार्य है। कई लोग केवल कुछ इंजेक्शन लगवाने के बाद खुद को सुरक्षित समझ लेते हैं, जो कि खतरनाक साबित हो सकता है। यह मामला न केवल परिवार के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ा सबक है कि स्वास्थ्य मामलों में लापरवाही का कोई स्थान नहीं है। वर्तमान में, मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर किशोर की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन हालत चिंताजनक बनी हुई है।

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Team Nainital Samachar - Anita Sharma

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