रुद्रपुर में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने बायोटेक भवन का उदघाटन किया
रुद्रपुर में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने बायोटेक भवन का उदघाटन किया
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने सोमवार को गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में जैव प्रौद्योगिकी परिषद के नए भवन का लोकार्पण किया। इस भवन का उद्देश्य कृषि के क्षेत्र में नई तकनीकों का उपयोग करना है।
रुद्रपुर : उत्तराखंड के परिवहन, सूचना प्रौद्योगिकी एवं सुराज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा ने सोमवार को गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय परिसर में जैव प्रौद्योगिकी परिषद के मुख्यालय भवन का उदघाटन किया। इस समारोह में उपस्थित मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्ज्वलन किया और शिलापट्ट का अनावरण करते हुए राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के गायन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका
मंत्री श्री बत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि जैव प्रौद्योगिकी कृषि उत्पादकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करने, तकनीकों के विकास और नए उत्पादों के आयात को बढ़ावा देने का महत्व बताया। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी आधारित फसलों के विकास के लिए वैज्ञानिकों को प्रेरित करते हुए नैनो उर्वरक, हर्बल ग्रीन टी, हर्बल साबुन, समरानी कप, और मशरूम अचार जैसे परिषद के उत्पादों का विमोचन किया।
भवन की सुविधाओं का अवलोकन
इससे पहले, मंत्री ने भवन की प्रयोगशाला और पुस्तकालय का निरीक्षण किया। समारोह में उन्हें अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
परिषद की योजनाएँ
बायोटेक निदेशक डॉ. संजय कुमार ने परिषद की गतिविधियों और नई योजनाओं से सभी को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि परिषद का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के किसानों, युवाओं और उद्यमियों के लिए शोध और विकास कार्यों को प्रस्तुत करना है। इस अवसर पर, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला और प्रगतिशील किसान डॉ. एस.एस. गौरैया ने भी अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में 'एक पेड़ मां के नाम मिशन' के तहत वृक्षारोपण किया गया, जिसमें मंत्री श्री बत्रा ने रुद्राक्ष का पेड़ लगाया। संचालन का कार्य डॉ. मणिंद्र मोहन और डॉ. कंचन कार्की ने किया। इस दौरान बायोटेक परिषद के कई अधिकारी, कर्मचारी और शोधार्थी भी मौजूद रहे।
यह नया भवन न केवल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए अवसर भी प्रदान करेगा। इसके माध्यम से किसान बेहतर तकनीकों और विज्ञान आधारित उपायों का लाभ उठा सकेंगे।
इस नई पहल के साथ ही उत्तराखंड में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और उन्नत तकनीक को खेती में समाहित करने की दिशा में एक नई शुरुवात हुई है।
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सादर,
टीम नैनिताल समाचार - सुमेधा रावत
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