उत्तराखण्ड में शिक्षा सुधार की नई दिशा, मदरसा बोर्ड खत्म कर नया शिक्षा मॉडल लागू: मुख्यमंत्री धामी
उत्तराखण्ड में शिक्षा सुधार की नई दिशा, मदरसा बोर्ड खत्म कर नया शिक्षा मॉडल लागू: मुख्यमंत्री धामी
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री धामी ने मदरसा बोर्ड को समाप्त कर एक नए शिक्षा मॉडल की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान शैक्षणिक अवसर प्रदान करना है।
19 जुलाई 2023 को देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का उद्घाटन किया। इस अवसर पर विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। उन्होंने “वन नेशन-वन एजुकेशन” की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम उठाया है, जिससे अल्पसंख्यक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा मिल सकेगी।
शिक्षा का नया मॉडल क्या है?
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नये शिक्षा मॉडल के अंतर्गत सभी सेक्टरों के बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। यह व्यवस्था न केवल अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को लाभान्वित करेगी बल्कि उनके शिक्षा के भविष्य का भी आधार बनेगी। अब सभी बच्चों को आधुनिक शिक्षा और कौशल विकास से युक्त पाठ्यक्रम प्रदान किए जाएंगे।
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का महत्व
यह प्राधिकरण केवल शिक्षण संस्थाओं को मान्यता ही नहीं प्रदान करेगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पारदर्शिता, और शिक्षक प्रशिक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस प्राधिकरण की स्थापना का उद्देश्य सभी वर्गों को एक समान शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना है, जिससे बच्चे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर सकें।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप नीतियाँ
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि यह नया ढांचा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत विकसित किया गया है, जिसका लक्ष्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है, बल्कि एक नए कौशल, नवाचार और उद्यमिता को भी शामिल करना है। उन्होंने कहा, "शिक्षा केवल रोजगार पाने का साधन नहीं है, बल्कि समाज को सशक्त और जागरूक बनाने का एक प्रभावी रास्ता है।"
सभी अल्पसंख्यक समुदायों को मिलेंगे समान अवसर
धामी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को समान अवसर मिलेंगे। इससे पहले जिन वर्गों को शिक्षा के क्षेत्र में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया, उन्हें भी अब बराबरी का मौका मिलेगा।
भविष्य की दिशा
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह प्राधिकरण हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा और उत्तराखण्ड को गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य बना देगा। मुख्यमंत्री ने धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से अनुरोध किया कि वे इस पहल को सफल बनाने में सहयोग करें।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा, और अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।
इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने कहा कि "उत्तराखण्ड को ज्ञान और संस्कार का प्रकाशस्तंभ बनाना है।" उनके अनुसार, बेहतर शिक्षा ही विकास का आधार है जो समाज को मजबूत और सशक्त बनाएगी।
आरोहण पर, शिक्षा का यह नया अध्याय उत्तराखण्ड की नई पहचान स्थापित करेगा।
इस बदलाव के साथ, उत्तराखण्ड एक नई ऊंचाई पर पहुँचेगा जहां न केवल शिक्षा का स्तर बढ़ेगा बल्कि समाज में समानता भी स्थापित होगी।
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सादर,
टीम नैनीताल समाचार
(नीता शर्मा)
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