उत्तराखंड: वन संरक्षण एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण है
उत्तराखंड: वन संरक्षण एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण है
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कम शब्दों में कहें तो, वन संरक्षण केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है; यह हमारे पर्यावरण के संपूर्ण संतुलन को सहेजने की आवश्यकता है। यह बात हाल ही में देहरादून में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यशाला में उजागर की गई, जिसमें केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने भाग लिया। इस कार्यशाला का आयोजन अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस 2026 के उपलक्ष्य में किया गया था, जहां पर वन आधारित सतत जैव-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य और विषय
इस कार्यक्रम का उद्घाटन भूपेंद्र यादव ने किया और उन्होंने बताया कि इस बार के कार्यशाला का मुख्य विषय “वन-आधारित सतत जैव-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना: मुद्दे और चुनौतियाँ" रखा गया है। उनका मानना था कि मानव जाति तभी सुरक्षित रह सकती है जब वह प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व के सिद्धांत को अपनाए।
पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण
भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि वन संरक्षण की अवधारणा केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसके अंतर्गत पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण अनिवार्य है। उन्हें इस बात की आवश्यकता महसूस हुई कि वानिकी के क्षेत्र में एक व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय की आवश्यकता है।
सांस्कृतिक मूल्यों का महत्व
मंत्री ने वन संसाधनों के भविष्य को सुरक्षित रखने में सांस्कृतिक मूल्यों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वनों का संरक्षण केवल आर्थिक विकास की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस का वैश्विक विषय
इस वर्ष की अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस की वैश्विक थीम “वन और अर्थव्यवस्थाएँ” है। यह वनों की भूमिका को उजागर करती है जो आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देती है और आजीविका के लिए महत्वपूर्ण है। कार्यशाला के दौरान कई विषयों पर चर्चा की गई, जैसे कि वन-आधारित जैव-उत्पादों का व्यवसायीकरण, स्थायी प्रबंधन, नवाचार और उद्यमिता। इसका उद्देश्य मूल्य वर्धित उत्पादों का निर्माण करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उत्पन्न करना है।
उपस्थित विशिष्ट व्यक्ति और आयोजन का महत्व
इस अवसर पर आईसीएफआरई की महानिदेशक कंचन देवी ने भूपेंद्र यादव को उत्तराखंड के राजकीय पक्षी मोनाल का चित्र भेंट किया। इस कार्यशाला में पर्यावरण सचिव तन्मय कुमार और अनेक वैज्ञानिक, नीति-निर्माता तथा विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे। इस प्रकार की कार्यशालाएँ भारत की वन-आधारित जैव-अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगी।
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सादर,
टीम नैनीताल समाचार अनुश्री कुमारी
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