उत्तराखंड: भारतीय ज्ञान और विज्ञान का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

May 6, 2026 - 08:30
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उत्तराखंड: भारतीय ज्ञान और विज्ञान का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
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उत्तराखंड: भारतीय ज्ञान और विज्ञान का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड सरकार हरिद्वार में स्थित मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान को एक वैश्विक पहचान दिलाने पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हाल ही में आयोजित एक बैठक में इस संस्थान के विकास की योजनाओं की समीक्षा की गई।

देहरादून। उत्तराखंड की सरकार अब हरिद्वार स्थित ऋषिकुल में 'मदान मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान' को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का केंद्र बनाने के लिए तेजी से कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान इस संस्थान के विकास और विस्तार के लिए कई योजनाओं पर चर्चा की। सरकार का उद्देश्य इस संस्थान को भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान और आधुनिक शोध का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाना है। मुख्यमंत्री ने इस बात को भी रेखांकित किया कि उत्तराखंड केवल आध्यात्म की भूमि नहीं है, बल्कि यह ऋषियों के वैज्ञानिक चिंतन की धरोहर भी है।

कुंभ से पहले कार्य पूरा करने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री धामी ने निर्देश दिए हैं कि इस संस्थान के पुनरुद्धार और विस्तार का कार्य आगामी कुंभ मेले के प्रारंभ से पहले पूरा किया जाए। इस परियोजना का नोडल विभाग पर्यटन विभाग होगा, और प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु को इस कार्य की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि विकास के साथ-साथ हमारे प्राचीन विरासत का संरक्षण भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्राचीन विज्ञान और आधुनिक शोध का संगम

यह संस्थान न केवल धार्मिक शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करेगा, बल्कि प्राचीन भारत के वैज्ञानिक ज्ञान पर भी विशेषज्ञता प्राप्त करेगा। बैठक में धामी ने उदाहरण दिया कि यहां वैदिक गणित, वेदों में निहित वैज्ञानिक सिद्धांत, उपनिषदों के दर्शन और भारतीय तर्कशास्त्र पर शोध किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण है कि प्राचीन विद्वानों जैसे आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और वराहमिहिर के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए।

संस्कार और राष्ट्र निर्माण का केंद्र

मुख्यमंत्री ने इस संस्थान को केवल अकादमिक अध्ययन तक सीमित न रखने की बात कही, बल्कि उन्होंने इसे विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना जागृत करने का केंद्र बनाने के लिए भी जोर दिया। इस उद्देश्य के लिए एक आधुनिक डिजिटल पांडुलिपि संरक्षण केंद्र, एक समृद्ध पुस्तकालय, ई-लर्निंग सुविधाएं और शोध प्रयोगशालाओं का निर्माण किया जाएगा। यह संस्थान आयुर्वेद, ज्योतिष और योग शिक्षा के क्षेत्र में भी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाएगा।

पांच विशेष अध्ययन केंद्रों की स्थापना

इस संस्थान में ज्ञान की विभिन्न विधाओं के लिए पांच अलग-अलग केंद्र विकसित करने की योजना है:

  • श्रुति केंद्र: वेद, उपनिषद और शास्त्रीय ज्ञान की परंपरा का अध्ययन किया जाएगा।
  • दर्शन केंद्र: भारतीय दर्शन और चेतना के गहन विचार-विमर्श के लिए केंद्र होगा।
  • आयु केंद्र: आयुर्वेद और समग्र स्वास्थ्य विज्ञान पर शोध होगा।
  • विज्ञान केंद्र: भारतीय ज्ञान प्रणालियों और पारंपरिक विज्ञान की विरासत को संजोया जाएगा।
  • कला केंद्र: भारतीय कला, संस्कृति और सौंदर्य परंपरा की अभिव्यक्ति के लिए केंद्र होगा।

बैठक में मौजूद अधिकारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव धीराज गर्ब्याल और अन्य अधिकारी उपस्थित थे। साथ ही हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सोनिका, अपर सचिव बंशीधर तिवारी और हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित भी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। सरकार की इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि उत्तराखंड आने वाले समय में भारतीय विद्या और संस्कृति का प्रमुख केंद्र बनेगा।

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धन्यवाद,
टीम नाइनताल समाचार, अनुश्री शर्मा

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