उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता में महत्वपूर्ण बदलाव, संशोधन अध्यादेश लागू
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता में महत्वपूर्ण बदलाव, संशोधन अध्यादेश लागू
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Nainital Samachar
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code, UCC) में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं, जिनमें विवाह से जुड़े प्रावधानों में सख्ती बढ़ाई गई है।
संशोधन अध्यादेश विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत जानकारी को विवाह निरस्तीकरण का आधार मानता है।
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आज राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) द्वारा उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को लागू किया गया है।
संशोधन में किए गए मुख्य बदलाव
इस संशोधन अध्यादेश में सबसे प्रमुख बदलाव यह है कि अब आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 और भारतीय दंड संहिता के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 लागू किया गया है।
प्रशासनिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं:
धारा 12 के अंतर्गत 'सचिव' के बदले 'अपर सचिव' को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और प्रभावी हो सकेगी। इसके साथ ही, यदि उप-पंजीयक निर्दिष्ट समय में कार्रवाई नहीं करता है, तो मामला स्वतः पंजीयक और पंजीयक जनरल के पास भेजा जाएगा।
इसके अलावा, उप-पंजीयक पर लगाए गए दंड के खिलाफ अपील करने का अधिकार भी जोड़ा गया है, और दंड की वसूली अब भू-राजस्व की तरह की जाएगी।
विवाह से जुड़े प्रावधानों में सख्ती
गंभीरता से विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत जानकारी प्रस्तुत करने को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है। इसके अलावा, विवाह और लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी या अन्य विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं।
लिव-इन संबंध की समाप्ति पर अब पंजीयक द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र जारी करने का प्रावधान किया गया है, जो भविष्य में कानूनी विवाद से बचाएगा।
भाषाई संवेदनशीलता में सुधार
सामाजिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण बदलाव अनुसूची-2 में किया गया है, जहां 'विधवा' शब्द के स्थान पर 'जीवनसाथी' शब्द का प्रयोग किया जाएगा। यह कदम अधिक समावेशी और संवेदनशील माना जा रहा है।
इसके साथ ही, विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को दी गई है। यह निर्णयों में एकरूपता सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
राज्य सरकार का उद्देश्य इन संशोधनों के माध्यम से समान नागरिक संहिता को अधिक स्पष्ट, प्रभावी और नागरिक हितैषी बनाना है, साथ ही प्रशासनिक दक्षता को सुनिश्चित करना है।
इसके अलावा, अधिक जानकारी के लिए [Nainital Samachar](https://nainitalsamachar.com) पर जाएं।
सादर, टीम नैनिताल समाचार, साक्षी शर्मा
Tags:
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
Related Posts
ऑपरेशन प्रहार: बैरागीवाला हत्या मामले में तीन अन्य आरोप...
Nainital Samachar ... Jul 3, 2026 133 312.1k
हरिद्वार: पंजाब से जाली नोट लेकर आए चार युवक गिरफ्तार, ...
Nainital Samachar ... Jul 7, 2026 137 140.6k
एम्स ऋषिकेश में राज्य वासियों के लिए विशेष पंजीकरण काउं...
Nainital Samachar ... Jul 9, 2026 151 55.1k
देहरादून में निहारिका साहित्य मंच का भव्य कवि सम्मेलन स...
Nainital Samachar ... Jun 7, 2026 110 501.8k
रात्रिकालीन कार्यों को मिली सशर्त अनुमति, लापरवाही पर ड...
Nainital Samachar ... Jun 23, 2026 123 501.8k
देहरादून पुलिस लाइन में विदाई समारोह, सेवानिवृत्त अधिका...
Nainital Samachar ... Jul 1, 2026 162 397k
-
Swati BhattHow can technology ensure transparency and reduce manual intervention?5 months agoReplyLike (176) -
Meenakshi MenonThis requires careful consideration from every responsible citizen.5 months agoReplyLike (132) -
Hemlata TiwariDil se dhanyavaad aisi news ke liye.5 months agoReplyLike (101) -
Tanisha DasThe long-term vision behind this needs to be understood.5 months agoReplyLike (122) -
Kavya MalikHow is accountability ensured at various levels regarding this?5 months agoReplyLike (131) -
Megha RathiHow will the effectiveness of the implementation be measured?5 months agoReplyLike (90)