उत्तराखंड: पत्रकार को ढाई साल से नहीं मिला पानी, शिकायत के बाद एक बड़ा बिल थमाया गया
उत्तराखंड: पत्रकार को ढाई साल से नहीं मिला पानी, शिकायत के बाद एक बड़ा बिल थमाया गया
कम शब्दों में कहें तो पौड़ी गढ़वाल जिले में एक पत्रकार को पिछले ढाई वर्षों से पानी नहीं मिल रहा, जबकि जब उन्होंने शिकायत की, तो उन पर ₹92,784 का बिल थमाया गया। यह मामला रिवर्स माइग्रेशन के सरकारी दावों की हकीकत को उजागर करता है।
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पौड़ी गढ़वाल।
उत्तराखंड में रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाएँ, जो अक्सर सस्ती प्रचार जैसी लगती हैं, एक नए विवाद में फंस गई हैं। दिल्ली के बड़े मीडिया संस्थानों में 15 वर्षों तक काम करने के बाद अपने गांव लौटे एक पत्रकार ने एक गंभीर समस्या का सामना किया है: उन्हें बीते ढाई साल से पीने के पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
होमस्टे की स्थापना और संघर्ष की शुरुआत
लैंसडोन तहसील के ग्राम पाली तल्ली के निवासी सूर्या बड़थ्वाल ने 2023 में राज्य सरकार की दीन दयाल होमस्टे योजना के तहत पर्यटन विभाग की मदद और बैंक ऋण की सहायता से अपने गांव में एक होमस्टे की स्थापना की। उनका उद्देश्य ना केवल स्वरोजगार का सृजन करना था, बल्कि अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल भी करना था।
पानी का संकट: आवेदनों का सिलसिला
सूर्या बड़थ्वाल ने बताया कि उन्होंने सितंबर 2023 से पेयजल कनेक्शन के लिए कई बार आवेदन किए। उनके अनुसार, “हर घर नल जल योजना” के तहत भैरव गढ़ी पेयजल योजना से कनेक्शन की मांग की गई, लेकिन संबंधित विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
शिकायत के बाद बिल का मामला
जब सूर्या ने 25 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराई, तो उन्हें जल निगम कोटद्वार द्वारा ₹92,784 का बिल थमाया गया। विभाग ने साफ तौर पर कहा कि बिना इस राशि का भुगतान किए कनेक्शन नहीं दिया जाएगा। सूर्या ने इसे “बदले की भावना से की गई कार्रवाई” करार दिया है, यह कहते हुए कि सामान्य घरेलू कनेक्शन के लिए इतनी बड़ी राशि का कोई औचित्य नहीं है।
अधिकारियों पर गंभीर आरोप
सूर्या ने जल निगम के अधिशासी अभियंता अजय बेलवाल और जेई शाहदत अली पर मनमानी, भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सीएम पोर्टल पर गलत रिपोर्ट दी कि उनका भवन निर्माणाधीन है, जबकि वे 2022 से उसी भवन में रह रहे हैं।
होमस्टे संचालन पर संकट
पानी की किल्लत के कारण उनका होमस्टे प्रभावित हो रहा है, जबकि बैंक लोन की किस्त भी चुकानी है। सूर्या ने कहा, “गांव लौटकर रोजगार शुरू करने का मेरा फैसला अब गलत साबित होता दिख रहा है।”
रिवर्स माइग्रेशन पर उठ रहे सवाल
इस प्रशासनिक उदासीनता के कारण पहाड़ लौटने की इच्छा रखने वाले युवाओं का मनोबल टूट रहा है। सूर्या ने कहा, “मेरे साथ ऐसा हो सकता है, तो आम ग्रामीणों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।” यह रिवर्स माइग्रेशन की योजनाओं की असलियत पर सवाल उठाता है।
जनप्रतिनिधियों को पत्र
पीड़ित ने सांसद, विधायक, विधानसभा अध्यक्ष, जिलाधिकारी और संबंधित विभागों को भी पत्र भेजे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।
इन समस्याओं से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी योजनाएँ जमीन पर सफल नहीं हो पा रही हैं। इसके लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है ताकि ऐसी समस्याएँ अन्य नागरिकों के साथ न हों। सूर्या बड़थ्वाल जैसे लोगों की आवाज़ सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना हमारे प्रशासन प्रशासनिक दायित्व है।
इस मामले में आपके क्या विचार हैं? क्या आपको लगता है कि ऐसी घटनाएँ आगे बढ़ने वाली युवा पीढ़ी के मन में क्या संदेश दे रही हैं?
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संपर्क: टीम नैनिताल समाचार
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