Uttarakhand: आयुष्मान योजना में अवैध वसूली और लापरवाही के खिलाफ कड़ा कदम, तीन अस्पताल निलंबित
उत्तराखंड में आयुष्मान योजना में गंभीर अनियमितताएं: तीन अस्पतालों का निलंबन
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कम शब्दों में कहें तो: उत्तराखंड में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत निजी अस्पतालों की लापरवाही और अवैध वसूली पर राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने तीन अस्पतालों को निलंबित कर दिया है।
देहरादून। उत्तराखंड में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना, और राज्य सरकारी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत कार्यरत निजी अस्पतालों की मनमानी पर सख्ती से लगाम लगाने के लिए राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने कड़े कदम उठाए हैं। इस कार्रवाई में प्राधिकरण ने मानकों की अनदेखी, मरीजों को कैशलेस इलाज की सुविधा न देने, और नियमों के विरुद्ध अवैध धन वसूली के आरोप में तीन अस्पतालों की संबद्धता को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा, एक अन्य अस्पताल पर भारी वित्तीय जुर्माना भी लगाया गया है।
निलंबित अस्पतालों की सूची
प्राधिकरण के इस सख्त कदम से उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के अलावा देहरादून के दो प्रमुख अस्पताल, ओजस्वी और अरिहंत भी प्रभावित हुए हैं। इन तीनों अस्पतालों की संबद्धता को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही, बलूनी अस्पताल पर वित्तीय दंड लगाते हुए प्रबंधन को सुधार के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। प्राधिकरण की जांच में यह भी पाया गया कि ये अस्पताल आयुष्मान कार्ड धारकों को निशुल्क इलाज देने में आनाकानी कर रहे थे और कई मामलों में रेफरल मरीजों को भर्ती करने से भी मना कर दिया गया था।
अनौचित्य की पुष्टि
जांच रिपोर्ट में सबसे गंभीर आरोप मरीजों से अवैध रूप से पैसे वसूलने का सामने आया है। उदाहरण के लिए, देहरादून के ओजस्वी अस्पताल में एक लाभार्थी से उपचार के नाम पर 12,000 रुपये की अवैध वसूली की गई थी। इस शिकायत की पुष्टि होने के बाद प्राधिकरण ने अस्पताल की संबद्धता को निलंबित कर दिया और उन पर 60,000 रुपये का जुर्माना भी ठोक दिया। इसी तरह, बलूनी अस्पताल में एक मरीज से दवाइयों और विभिन्न जांचों के नाम पर 17,250 रुपये लिए गए थे। जब अस्पताल प्रबंधन इन खर्चों से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, तो प्राधिकरण ने उन पर पांच गुना अधिक यानी 86,250 रुपये का जुर्माना लगा दिया और 15 दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम दिया।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी
निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि इन सूचीबद्ध अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित अनुपलब्धता एक बड़ी समस्या बनी हुई थी। साथ ही, सरकारी पोर्टल पर दी गई जानकारियों में भी भारी अनियमितताएं और विसंगतियां देखी गईं। अरिहंत अस्पताल की डायलिसिस यूनिट की जांच में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ती मिलीं। वहां संक्रमण नियंत्रण और चिकित्सकीय पर्यवेक्षण की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। इन गंभीर खामियों के चलते अस्पताल की संबद्धता को रोक दिया गया है और प्रबंधन से 15 दिनों के भीतर विस्तृत सुधार रिपोर्ट मांगी गई है।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण का सख्त संदेश
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने इस कार्यवाही के माध्यम से सभी सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को एक सख्त संदेश दिया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि आयुष्मान योजना के तहत आम जनता और मरीजों के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में यदि कोई अस्पताल मरीजों को कैशलेस इलाज देने से मना करता है या अवैध वसूली में लिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ डी-एम्पैनलमेंट का कदम उठाया जाएगा। सरकार का मुख्य ध्येय पात्र लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और बिना किसी बाधा के स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है। इस समय स्वास्थ्य सेवाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए प्राधिकरण की टीम लगातार अस्पतालों की निगरानी कर रही है। यह स्पष्ट किया गया है कि जनहित की योजनाओं का लाभ रोकने वाले संस्थान किसी भी सूरत में बख्शे नहीं जाएंगे।
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सादर, टीम नैनीताल समाचार
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