Uttar Pradesh: दोहरे सीएमओ हत्याकांड के दोषी आनंद प्रकाश तिवारी की रिहाई याचिका खारिज

May 22, 2026 - 08:30
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Uttar Pradesh: दोहरे सीएमओ हत्याकांड के दोषी आनंद प्रकाश तिवारी की रिहाई याचिका खारिज
Uttar Pradesh: दोहरे सीएमओ हत्याकांड के दोषी आनंद प्रकाश तिवारी की रिहाई याचिका खारिज

Uttar Pradesh: दोहरे सीएमओ हत्याकांड के दोषी आनंद प्रकाश तिवारी की रिहाई याचिका खारिज

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार ने दोहरे सीएमओ हत्याकांड के दोषी आनंद प्रकाश तिवारी की समय से पहले रिहाई की याचिका खारिज कर दी है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने एनआरएचएम घोटाले के दौरान हुए दोहरे सीएमओ हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आनंद प्रकाश तिवारी को समय से पहले जेल से रिहा करने की याचिका को खारिज कर दिया है। गृह विभाग ने बुधवार को जारी आदेश में बताया कि तिवारी के अपराध की गंभीरता और उसके द्वारा किए गए कृत्यों के व्यापक नकारात्मक प्रभाव के चलते उसे रिहा नहीं किया जा सकता।

आनंद प्रकाश तिवारी, जो लखनऊ के विकास नगर का निवासी है, वर्तमान में दो हत्या के मामलों में सजा काट रहा है। यह मामला वर्ष 2010 और 2011 के दौरान उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) में हुए बडे़ भ्रष्टाचार से जुड़ा है। तिवारी को 27 अक्टूबर 2010 को तत्कालीन सीएमओ (परिवार कल्याण) डॉ. विनोद कुमार आर्य की हत्या और फिर 2 अप्रैल 2011 को उनके स्थान पर आए अगले सीएमओ डॉ. बीएन सिंह की हत्या का दोषी पाया गया था।

इन हत्याओं ने तब देश के राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल में खलबली मचा दी थी। भ्रष्टाचार की परतों के खुलासे और गवाहों को ख़त्म करने की योजनाओं के कारण मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। सीबीआई की विशेष अदालत ने तिवारी को दोनों मामलों में जेल की सजा सुनाई थी।

सरकार का आदेश और तिवारी की स्थिति

राज्य सरकार के आदेश के तकनीकी आधार पर नजर डालें तो आनंद प्रकाश तिवारी 1 अगस्त 2025 तक जेल में 14 वर्षों से अधिक की वास्तविक सजा काट चुका था। जेल रिकॉर्ड के अनुसार, इस अवधि में उसके आचरण को संतोषजनक बताया गया। जिला प्रोबेशन अधिकारी, स्थानीय पुलिस और जिला मजिस्ट्रेट की रिपोर्टों में भी उल्लेख था कि उसकी रिहाई के बाद उसके द्वारा अपराध किए जाने की आशंका कम है।

हालांकि, इन सकारात्मक रिपोर्टों के बावजूद, उत्तर प्रदेश सरकार ने रिहाई की याचिका नामंजूर कर दी। सरकार का रुख यह था कि तिवारी ने वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों की हत्या की, जो जनता की सेवा में लगे हुए थे। इस प्रकार की हत्याओं का समाज पर बुरा प्रभाव पड़ता है और इससे प्रशासनिक मनोबल को भी धक्का लगता है। इसलिए, राज्य सरकार ने रिहाई प्रदान करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया।

सरकार ने अपने आदेश में कहा कि एनआरएचएम घोटाले जैसे बड़े अपराध से जुड़े हत्यारों को समय से पहले रिहा करना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। इस निर्णय के माध्यम से, आनंद प्रकाश तिवारी को अपनी शेष सजा जेल में ही काटनी होगी।

इस घटना ने यह भी साबित किया है कि सरकारी तंत्र किसी भी प्रकार की भ्रष्टाचार या अपराध को सहन नहीं करेगा। यह न केवल कानून का शासन स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे समाज में सुरक्षा और विश्वास की भावना भी बढ़ती है।

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इस प्रकार, अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून की हथकड़ी से बच नहीं सकता। हमें आशा है कि ऐसे निर्णय समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होंगे।

ध्यान दें कि यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है, जिससे भविष्य में संवेदनशीलता और सजगता बरतने की आवश्यकता है।

सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा करते हुए, हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए कि सुरक्षा और न्याय को सर्वोपरि रखना अत्यंत आवश्यक है। इसमें कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

समाप्त करने के लिए, हमें अपनी न्यायिक प्रणाली पर विश्वास बनाए रखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जो अपराधी हैं, उन्हें उचित दंड मिले।

सादर,

टीम नैनीताल समाचार, साक्षी शर्मा

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