वीरभद्र महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक: विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण ने प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की
वीरभद्र महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक: विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण ने प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की
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देहरादून, 10 अक्टूबर 2025।
उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण ने आज प्राचीन सिद्धपीठ वीरभद्र महादेव मंदिर में पहुंचकर भगवान महादेव का रुद्राभिषेक किया। उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना करते हुए श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना संपन्न की।
कम शब्दों में कहें तो, विधानसभा अध्यक्ष ने अपनी धार्मिक आस्था का प्रदर्शन करते हुए मंदिर में महादेव की उपासना की, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रेरित किया। यह आयोजन केवल व्यक्तिगत आस्था का मामला नहीं था, बल्कि प्रदेश के लिए सुख और समृद्धि की कामना का प्रतीक था।
धार्मिक यात्रा का महत्व
इस अवसर पर श्रीमती खण्डूडी भूषण ने स्वयंभू पिपलेश्वर महादेव मंदिर में भी दर्शन कर विधिवत्त पूजन-अर्चन किया। यह प्राचीन मंदिर मनोकामना सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्वयं वीरभद्र जी ने यहां भगवान महादेव के लिंग की स्थापना की थी।
आशीर्वाद और आशीर्वाद प्राप्ति
पूजन-अर्चना के उपरांत विधानसभा अध्यक्ष ने परम पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानन्द गिरि महाराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किया और उनके पावन आशीर्वचन सुने। यह दिव्य रुद्राभिषेक एवं दर्शन कार्यक्रम पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ।
उपस्थिति का महत्व
इस अवसर पर वीरभद्र मंदिर के प्रबंधक रघुवीर गिरि जी महाराज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सह-कार्यवाह दिनेश सेमवाल जी, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल जी, ऋषिकेश नगर निगम के महापौर शंभू पासवान जी, कपिल गुप्ता, प्रमोद शर्मा, अश्विनी गुप्ता, भानू जी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
इस धार्मिक आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं को एकत्रित किया बल्कि राज्य की समृद्धि और कल्याण के लिए एक सकारात्मक माहौल भी तैयार किया। विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती खण्डूडी भूषण के रुद्राभिषेक करने के इस अवसर ने हमारे समाज में आध्यात्मिक चेतना का संचार किया है।
इसके साथ ही, श्रीमती खण्डूडी भूषण ने उत्तराखंड की ससक्तीकरण और महिलाओं के उत्थान के लिए भी अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। उनके इस अनुष्ठान ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आस्था और सामाजिक जिम्मेदारी का मेल हमारे समाज को और अधिक मजबूती प्रदान कर सकता है।
हम सभी को इस मौके को याद करते हुए अपने धर्म और संस्कृति के प्रति सचेत रहना चाहिए, ताकि हम अपनी अगली पीढ़ी को भी इसे समझा सकें। ऐसे आयोजन हमें एकजुट करते हैं और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देते हैं।
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