मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भरत मंदिर ऋषिकेश में वसंतोत्सव 2026 मैथिली ठाकुर नाइट का किया उद्घाटन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भरत मंदिर ऋषिकेश में वसंतोत्सव 2026 मैथिली ठाकुर नाइट का किया उद्घाटन
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज भरत मंदिर ऋषिकेश में आयोजित वसंतोत्सव 2026 में मैथिली ठाकुर के साथ शामिल होकर गंगा तट पर संस्कृति और संगीत का अनुपम संगम मनाया।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज भरत मंदिर, ऋषिकेश में आयोजित वसंतोत्सव 2026 – मैथिली ठाकुर नाइट में भाग लिया। यह समारोह गंगा के पावन तट पर हुआ, जहां बड़ी संख्या में साधु-संतों, स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मुख्यमंत्री धामी ने कार्यक्रम में भाग लेने पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि यह मौका सभी के लिए सौभाग्य का विषय है।
मुख्यमंत्राी ने अपने संबोधन में कहा कि, "मधुबनी की स्वरों की साधिका और देश की सबसे युवा विधायक सुश्री मैथिली ठाकुर का योगनगरी ऋषिकेश में स्वागत करना अपने आप में गर्व की बात है।" उन्होंने देश-प्रदेश से आए सभी श्रद्धालुओं का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम के आयोजकों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "गंगा के पवित्र तट पर आयोजित यह वसंतोत्सव भजन संध्या सांस्कृतिक और संगीत का अनुपम संगम है, जो लोक संस्कृति और सनातन परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है।" उन्होंने ऋषिकेश बसंतोत्सव समिति को इस भव्य आयोजन के लिए बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की भी चर्चा की। उन्होंने कहा, "यहां योग और अध्यात्म का प्रमुख केंद्र है, और यह स्थान सनातन संस्कृति की प्राचीन पुण्यभूमि है।" उन्होंने उल्लेख किया कि सतयुग में महर्षि रैभ्य को भगवान विष्णु के दर्शन हुए और त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने तपस्या की, जो इस भूमि की धार्मिक महत्ता को दर्शाता है।
श्री धामी ने मैथिली ठाकुर की साधना और उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा, "उनकी यात्रा यह दर्शाती है कि कैसे कला और संस्कृति समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा बन सकती हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि जब बहुत से युवा पश्चिमी संगीत की ओर आकर्षित हो रहे हैं, तब मैथिली ने अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए मैथिली और भोजपुरी लोक संगीत को विस्तृत रूप से प्रस्तुत किया है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की बात की। उन्होंने कहा, "इस दिशा में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं चल रही हैं जैसे अयोध्या में श्रीराम मंदिर और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर।" उन्होंने उत्तराखंड सरकार की ओर से केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन और हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर पर चल रहे कार्यों का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि की संस्कृति, सामाजिक संतुलन और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार जनसमर्थन से उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाएगी।
अंत में, मुख्यमंत्री धामी ने सभी उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपनी सांस्कृतिक धरोहर को पहचानें और इसे आगे बढ़ाने में योगदान दें।
सरकार की इस पहल ने निश्चित ही लोगों में सांस्कृतिक जागरूकता और एकता की भावना को बढ़ावा दिया है।
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सादर,
टीम नैनिताल समाचार, निंदा कुमारी
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