UCC समान नागरिक संहिता में अहम बदलाव, उत्तराखंड सरकार ने लागू किया संशोधन अध्यादेश
इसमें विवाह से जुड़े प्रावधानों में भी सख्ती की गई है. विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत जानकारी प्रस्तुत किए जाने को अब विवाह निरस्तीकरण का आधार माना जाएगा.

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code, UCC) को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. उत्तराखंड समान नागरिक संहिता, 2024 में आवश्यक संशोधनों के लिए समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को राज्यपाल की स्वीकृति के बाद तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है
किया ये सबसे अहम बदलाव
संशोधन अध्यादेश के तहत सबसे अहम बदलाव यह किया गया है कि अब आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 और भारतीय दंड संहिता के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 को लागू किया गया है. इससे UCC के तहत दर्ज होने वाले मामलों में नवीन आपराधिक कानूनों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी.
प्रशासनिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए
प्रशासनिक स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं. धारा 12 के अंतर्गत अब ‘सचिव’ के स्थान पर ‘अपर सचिव’ को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है, जिससे निर्णय प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाया जा सके. इसके अलावा यदि उप-पंजीयक निर्धारित समय-सीमा के भीतर किसी प्रकरण में कार्रवाई नहीं करता है, तो वह मामला स्वतः पंजीयक और पंजीयक जनरल को भेजे जाने का प्रावधान किया गया है. इससे अनावश्यक देरी पर अंकुश लगेगा.
संशोधन में उप-पंजीयक पर लगाए गए दंड के विरुद्ध अपील का अधिकार भी जोड़ा गया है. साथ ही दंड की वसूली अब भू-राजस्व की भांति की जाएगी, जिससे दंडात्मक प्रावधानों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके.
शादी से जुड़े प्रावधानों में सख्ती
वहीं विवाह से जुड़े प्रावधानों में भी सख्ती की गई है. विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत जानकारी प्रस्तुत किए जाने को अब विवाह निरस्तीकरण का आधार माना जाएगा. वहीं विवाह और लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी या किसी भी विधि-विरुद्ध कृत्य के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं.
लिव-इन संबंधों को लेकर भी अध्यादेश में स्पष्टता लाई गई है. लिव-इन संबंध की समाप्ति पर अब पंजीयक द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार के कानूनी विवाद से बचा जा सके.
विधवा शब्द के स्थान पर अब जीवनसाथी
भाषाई और सामाजिक दृष्टि से एक अहम बदलाव अनुसूची-2 में किया गया है, जहां ‘विधवा’ शब्द के स्थान पर अब ‘जीवनसाथी’ शब्द का प्रयोग किया जाएगा. इसे अधिक समावेशी और संवेदनशील कदम माना जा रहा है.इसके अलावा विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को प्रदान की गई है, जिससे निर्णयों में एकरूपता बनी रहे.
राज्य सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का मूल उद्देश्य समान नागरिक संहिता को अधिक स्पष्ट, प्रभावी और नागरिक हितैषी बनाना है. साथ ही प्रशासनिक दक्षता को सुदृढ़ करते हुए नागरिकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना भी इन बदलावों का प्रमुख लक्ष्य है.
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
Related Posts
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने लिया परीक्षा केन्द्रों में जाकर...
Nainital Samachar ... Feb 21, 2026 147 501.8k
*कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने होलिका दहन में किया प्रतिभ...
Nainital Samachar ... Mar 3, 2026 138 346k
हरिद्वार यूनिवर्सिटी में “फार्मा अन्वेषण” का आयोजन, छात...
Nainital Samachar ... Mar 7, 2026 130 182.1k
राजभवन घेराव में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, हजारों कार...
Nainital Samachar ... Feb 17, 2026 112 501.8k
जेपी दलाल जन्मदिन विशेष: लोहारू के लाल, हरियाणा के गौरव
Nainital Samachar ... Feb 9, 2026 114 501.8k
-
Swati BhattHow can technology ensure transparency and reduce manual intervention?1 month agoReplyLike (176) -
Meenakshi MenonThis requires careful consideration from every responsible citizen.1 month agoReplyLike (132) -
Hemlata TiwariDil se dhanyavaad aisi news ke liye.1 month agoReplyLike (101) -
Tanisha DasThe long-term vision behind this needs to be understood.1 month agoReplyLike (122) -
Kavya MalikHow is accountability ensured at various levels regarding this?1 month agoReplyLike (131) -
Megha RathiHow will the effectiveness of the implementation be measured?1 month agoReplyLike (90)