जनता की समस्याओं का सीधा समाधान - धामी मॉडल ने प्रशासन को घर-घर पहुँचाया
जनता की समस्याओं का सीधा समाधान - धामी मॉडल ने प्रशासन को घर-घर पहुँचाया
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' कार्यक्रम ने सरकारी सेवाओं को आम नागरिकों के द्वार पर पहुँचाने का एक सफल प्रयास किया है।
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे अब फाइलों में नहीं, बल्कि जनता के बीच सक्रियता से दिखाई दें। आज 13 जनपदों में आयोजित 135 शिविरों के माध्यम से 74,087 नागरिकों ने अपनी समस्याएँ दर्ज कराई, जिनमें से 8,408 आवेदनों का त्वरित समाधान किया गया।
धामी मॉडल: सुशासन की नई पहचान
मुख्यमंत्री के अनुसार, "मेरे लिए शासन का अर्थ केवल आदेश देना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को समझकर उनका त्वरित समाधान करना है।" धामी मॉडल ने साबित किया है कि शासन अब केवल सचिवालय तक सीमित नहीं है, बल्कि हर गाँव, हर घर और हर जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुँचने का प्रयास कर रहा है।
विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत आज तक 13,934 प्रमाण पत्र जारी किए गए और 47,878 नागरिकों को इन योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया। यह पहल केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का प्रतीक है।
जनता के दरवाजे पर सरकार
मुख्यमंत्री धामी ने कहा, "उत्तराखंड में शासन अब सत्ता का नहीं, सेवा का माध्यम है।" अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर पात्र नागरिक तक योजनाओं का लाभ पहुँचाएं, खासकर बुजुर्गों, दिव्यांगों और दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों के लिए समाधान सुनिश्चित करें।
शिविरों में प्राप्त हर आवेदन का पारदर्शी और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि जनता का विश्वास बना रहे। इस पहल से 'धामी मॉडल' उत्तराखंड में सुशासन की पहचान बन चुकी है जैसा कि कहीं और नहीं देखने को मिलता।
निष्कर्ष
धामी मॉडल न केवल एक प्रशासनिक पहल है, बल्कि एक व्यापक सामाजिक सुधार का हिस्सा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि गरीब, कमजोर और जरूरतमंद नागरिक भी शासन की सेवाओं का लाभ उठा सकें। सरकार अब जनता के दरवाजे पर है — न सुनवाई का इंतज़ार और न ही सिफारिश की जरूरत है। यह प्रयास दूसरी राज्य सरकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
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इस पहल के माध्यम से हमें यह समझना चाहिए कि शासन केवल आदेश देने का कार्य नहीं है, बल्कि उसे अपने नागरिकों की सेवा करने का भी एक माध्यम बनाना चाहिए।
सादर,
टीम नैनिताल समाचार - सुषमा शुक्ला
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