चारधाम यात्रा के लिए एनडीएमए और यूएसडीएमए की मॉक ड्रिल, 10 अप्रैल को तैनात होंगी तैयारियां

Apr 3, 2026 - 08:30
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चारधाम यात्रा के लिए एनडीएमए और यूएसडीएमए की मॉक ड्रिल, 10 अप्रैल को तैनात होंगी तैयारियां
चारधाम यात्रा के लिए एनडीएमए और यूएसडीएमए की मॉक ड्रिल, 10 अप्रैल को तैनात होंगी तैयारियां

चारधाम यात्रा के लिए एनडीएमए और यूएसडीएमए की मॉक ड्रिल, 10 अप्रैल को तैनात होंगी तैयारियां

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कम शब्दों में कहें तो, चारधाम यात्रा के दौरान आपदाओं से निपटने के लिए एनडीएमए और यूएसडीएमए मिलकर 10 अप्रैल को मॉक ड्रिल आयोजित करने जा रहे हैं, जिस पर गृह मंत्रालय का निर्देश है।

देहरादून: गृह मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) तथा उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) ने चारधाम यात्रा के दौरान किसी भी आपदा की स्थिति के लिए तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में, 10 अप्रैल को चारधाम यात्रा से संबंधित एक मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा।

गुरुवार को आयोजित एक ओरियंटेशन और कोऑर्डिनेशन कॉन्फ्रेंस में,” सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन” तथा एनडीएमए के सीनियर कंसलटेंट मेजर जनरल सुधीर बहल (अप्रा) ने मॉक ड्रिल की योजना और संचालन पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस मॉक ड्रिल का संचालन राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से किया जाएगा, जो यूएसडीएमए में स्थित है।

चारधाम यात्रा की सुरक्षा को लेकर सख्त तैयारियां

सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड के लिए एक महत्वपूर्ण आयोजन है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में सभी संबंधित विभागों ने अपनी तैयारियों को सुनिश्चित किया है। आपदा प्रबंधन विभाग भी पूरी तरह से सक्रिय है और इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य सभी हितधारकों को एक साथ लाकर आपात स्थितियों का सामना करने की क्षमता और तैयारी को सुनिश्चित करना है।

यह मॉक ड्रिल उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी और देहरादून सहित चारधाम यात्रा से जुड़े सात जिलों में आयोजित होगी। मेजर जनरल सुधीर बहल ने बताया कि यह अभ्यास आईआरएस यानी घटना प्रतिक्रिया प्रणाली के अंतर्गत आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों के अधिकारिक जिम्मेदारियों तथा कार्यों की स्पष्ट जानकारी दी जाएगी ताकि सभी Stakeholders समझ सकें कि आपात स्थिति में उनकी क्या भूमिका होगी।

रिसोर्स और रिस्क मैपिंग की आवश्यकता

मेजर जनरल बहल ने कहा कि चारधाम यात्रा जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के दौरान आपदाओं का सामना करने के लिए रिसोर्स और रिस्क मैपिंग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि कौन से संसाधन कहां स्थित हैं और संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की जीआईएस मैपिंग की जानी चाहिए। इससे आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी।

सुरक्षित यात्रा को लेकर दिशा-निर्देश

सुरक्षित चारधाम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं। मेजर जनरल बहल ने बताया कि होटल और धर्मशालाओं की क्षमता की जानकारी होना आवश्यक है, ताकि आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर रोका जा सके। इसके अलावा, मौसम संबंधी एलर्ट समय पर प्रदान करने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की जानकारी उपलब्ध कराने की बात भी कही गई ताकि यात्री सतर्क रहें।

चारधाम यात्रा मार्ग में ऐसे क्षेत्र जहां संचार व्यवस्थाएं नहीं हैं, वहां वैकल्पिक व्यवस्था को लागू किया जाएगा ताकि आवश्यक स्थिति में सूचनाओं का आदान-प्रदान सुचारू हो सके। इसके लिए सेटेलाइट आधारित संचार पर विचार करने की जरूरत भी बताई गई।

आपदा परिदृश्यों पर आधारित मॉक ड्रिल

मॉक ड्रिल के दौरान विभिन्न आपदा परिदृश्यों पर भी परीक्षण किया जाएगा। जिसमें सड़क दुर्घटनाएं, हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं, भूकंप, अग्निकांड, खराब मौसम, बाढ़, भूस्खलन जैसी आपदाएं शामिल हैं। इसके साथ ही, इस अभ्यास में विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों, एयरफोर्स, आर्मी, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय की प्रक्रिया का भी मूल्यांकन किया जाएगा।

बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन महावीर सिंह चैहान, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो. ओबैदुल्लाह अंसारी, डॉक्टर बिमलेश जोशी और अन्य अधिकारियों ने भी भाग लिया।

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— टीम नैनीताल समाचार (साक्षी सिंघल)

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