ऋषिकेश के रघु पासवान: एक महान अंगदाता, जो मरकर भी अमर हुए
मरकर भी अमर हुए ऋषिकेश के रघु पासवान
केडवरिक ऑर्गन डोनेशन से 5 लोगों को मिला नया जीवन, 2 को मिली दृष्टि
ऋषिकेश | 23 जनवरी 2026
कम शब्दों में कहें तो, ऋषिकेश में रघुवीर पासवान की कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण है। चाहे वह इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके द्वारा किए गए अंगदान ने 5 लोगों को नया जीवन दिया है और 2 अन्य को नेत्रदान के माध्यम से रोशनी मिली है। इस भावनात्मक घटना की केडवरिक ऑर्गन डोनेशन प्रक्रिया एम्स ऋषिकेश में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
रघुवीर पासवान, जो बिहार के निवासी थे, पेशे से राजमिस्त्री थे। हाल ही में एक कार हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जब उन्हें एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया, तब उनकी हालत गंभीर थी और उन्हें नॉन-रिवर्सिबल कोमा में डाल दिया गया। न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. रजनीश अरोड़ा के अनुसार, सभी चिकित्सा प्रयासों के बावजूद जनरल मेडिकल कमेटी ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया।
इसके बाद, एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह के निर्देशन में चिकित्सकों की एक टीम ने रघुवीर के परिवार से संपर्क किया और अंगदान के महत्व की जानकारी दी। इस प्रक्रिया में ऋषिकेश के मेयर शम्भू पासवान ने भी परिवार को प्रेरित किया। अंततः रघुवीर के परिवार ने अंगदान के लिए अपनी सहमति दी।
अंगदान के तहत रघुवीर की एक किडनी, लीवर और पैंक्रियाज पीजीआई चंडीगढ़ में विभिन्न मरीजों को प्रत्यारोपित किए जाएंगे। दूसरी किडनी एम्स दिल्ली के एक मरीज को और हृदय आर्मी हॉस्पिटल में अन्य मरीज को दिए जाने का कार्यक्रम बना है। इसके अलावा उनकी दोनों आंखों के कॉर्निया को भी एम्स के आई बैंक में सुरक्षित रखा गया, जिससे दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को फिर से रोशनी मिलने की संभावना है।
प्रक्रिया में ग्रीन कॉरिडोर से समय पर अंगों की ट्रांसपोर्टेशन
एम्स के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. भारत भूषण भारद्वाज ने बताया कि अंगों को सही समय पर अन्य स्थानों तक पहुँचाने के लिए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली की पुलिस की मदद से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था। यह ग्रीन कॉरिडोर एम्स ऋषिकेश से जौलीग्रांट एयरपोर्ट, दिल्ली और चंडीगढ़ तक गया।
डॉक्टरों का समर्पण और योगदान
यह प्रक्रिया विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा सुचारु रूप से पूर्ण की गई। इसमें न्यूरो सर्जन डॉ. रजनीश अरोड़ा, डॉ. संजय अग्रवाल, डॉ. रोहित गुप्ता, डॉ. अंकुर मित्तल, डॉ. करमवीर, डॉ. नीति गुप्ता, डॉ. मोहित धींगरा, डॉ. लोकेश अरोड़ा, डॉ. आशीष भूते और डॉ. आनंद नागर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त, अंग प्रत्यारोपण इकाई के समन्वयक देशराज सोलंकी और डीएनएस जीनू जैकेब की टीम ने भी संपूर्ण प्रक्रिया में सहयोग किया।
प्रो. मीनू सिंह ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा, “यह एम्स ऋषिकेश में केडवरिक ऑर्गन डोनेशन का दूसरा मामला है। रघुवीर पासवान ने अनेकों लोगों को जीवनदान देकर एक नई मिसाल कायम की है। अंगदान महादान है और समाज को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।”
अंत में, रघुवीर पासवान की कहानी केवल उनका व्यक्तिगत योगदान नहीं है, बल्कि यह समाज में अंगदान के महत्व को भी दर्शाती है। यह घटना सभी लोगों को यह प्रेरणा देती है कि वे भी अंगदान पर विचार करें और किसी और के जीवन में रोशनी लाने का काम करें।
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सादर,
दीप्ति कुमारी,
Team Nainital Samachar
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