उत्तराखंड: राष्ट्रपति के अभिभाषण में महिला उत्थान के प्रयासों की मिली सराहना
उत्तराखंड: राष्ट्रपति के अभिभाषण में महिला उत्थान के प्रयासों की मिली सराहना
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कम शब्दों में कहें तो, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में महिला सशक्तिकरण के प्रयासों की सराहना की, जिससे माहौल खुशी से भर गया।
नई दिल्ली। उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति ने एक नई ऊर्जा और उल्लास का संचार किया। यह विशेष कार्यक्रम उत्तराखंड की स्थापना की रजत जयंती के साथ-साथ भारतीय महिला क्रिकेट टीम के विश्व विजेता बनने की खुशी के साथ मनाया गया। इस मौके पर राष्ट्रपति ने स्पष्ट रूप से उत्तराखंड में नारी सशक्तिकरण के प्रयासों की सराहना की, जिससे वहां के सत्र में एक सकारात्मक और गर्मजोशी भरा माहौल बना रहा।
महिला सशक्तिकरण पर जोर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने महिला सशक्तिकरण के छवि को और उज्ज्वल करते हुए सभी सदस्यों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, और यह सच्चाई 25 वर्षों की यात्रा में स्पष्ट रूप से देखी गई है। राष्ट्रपति का यह अभिभाषण केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह उन सभी महिलाओं की मेहनत और संघर्षों का सम्मान था, जो राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
महिला शिक्षा और मातृ-शिशु स्वास्थ्य का महत्व
अपने अभिभाषण में, राष्ट्रपति ने महिला शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी के प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने उत्तराखंड के लिए प्रेरणादायक महिलाओं जैसे स्वर्गीय गौरा देवी और वंदना कटारिया को याद किया, जिनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। यह भी उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति ने सुप्रसिद्ध महिलाओं, जैसे स्वर्गीय सुशीला बलूनी, बछेंद्री पाल और राधा भट्ट का भी नाम लिया।
उत्तराखंड विधानसभा के गर्व की बात
राष्ट्रपति मुर्मु ने पहली महिला स्पीकर ऋतु खंडूरी भूषण की नियुक्ति को भी सराहा, जिससे विधानसभा का गौरव और बढ़ा। उन्होंने विधानसभा में महिला सदस्यों की संख्या में वृद्धि की अपेक्षा भी व्यक्त की, जिससे और अधिक महिलाओं को राजनीतिक मंच पर आने का अवसर मिलेगा।
महिला क्रिकेट टीम की उपलब्धि पर खुशी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विश्व विजय का जिक्र किया। जैसे ही उन्होंने बेटियों को बधाई दी, राष्ट्रपति ने तालियां बजाकर अपनी खुशी का इजहार किया, जो इस विशेष क्षण को और भी यादगार बना गई।
समान नागरिक संहिता पर चर्चा
अभिभाषण में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का विशेष उल्लेख भी किया गया। राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद-44 का हवाला देते हुए यूसीसी की महत्ता को रेखांकित किया, जिससे महिलाओं के लिए समानता का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने सभी सदस्यों की सराहना की, जिन्होंने इस कानून में योगदान दिया।
यह कार्यक्रम न केवल उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण था, बल्कि सरकार के कड़े प्रयासों को भी दर्शाता है। ऐसे प्रयासों का सफल होना समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आने वाले समय में, यह उम्मीद की जाती है कि उत्तराखंड में महिलाएं और अधिक सशक्त होंगी और समाज में एक नई ऊर्जा का संचार करेंगी।
फिर से कहें तो, महिला सशक्तिकरण की दिशा में उत्तराखंड के उठाए गए कदम न केवल उत्तराखंड के लिए, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी एक प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं।
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सादर,
टीम नैनिताल समाचार
सविता तिवारी
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