उत्तराखंड: मुख्यमंत्री धामी के कार्यकाल में 28,500 से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी
उत्तराखंड: मुख्यमंत्री धामी के कार्यकाल में 28,500 से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में उत्तराखंड में 28,500 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं, जो राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल की उपलब्धियों की चर्चा जोरों पर है। विशेष रूप से युवाओं को रोजगार देने के मामले में सरकार ने एक ऐसा आंकड़ा पेश किया है, जो राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कीर्तिमान माना जा रहा है। आधिकारिक विवरण के अनुसार, जुलाई 2021 में सत्ता संभालने के बाद से अब तक पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में साढ़े अट्ठाइस हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में स्थायी नियुक्तियां मिल चुकी हैं। अगर इस संख्या का समय के अनुसार विश्लेषण किया जाए, तो प्रदेश सरकार ने हर महीने औसतन 518 युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे हैं। यह उपलब्धि न केवल रोजगार के मामले में सरकार की सक्रियता को दर्शाती है, बल्कि प्रदेश के युवाओं में सरकारी तंत्र के प्रति विश्वास को भी मजबूत करती है।
भर्ती प्रणाली में सुधार
पुष्कर सिंह धामी ने जब 4 जुलाई 2021 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भर्ती प्रक्रियाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार और लेटलतीफी को दूर करने की थी। अपने 54 महीनों के कार्यकाल में उन्होंने भर्ती प्रणाली को सुव्यवस्थित करने पर विशेष ध्यान दिया। सरकार ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और चिकित्सा सेवा चयन आयोग जैसे प्रमुख निकायों के माध्यम से पारदर्शी तरीके से नियुक्तियां सुनिश्चित कीं। इन आयोगों की सक्रियता का परिणाम यह रहा कि रिकॉर्ड समय में 28,500 से अधिक पदों पर नियुक्तियां संभव हो सकीं। आने वाले एक वर्ष के लिए भी सरकार ने विभिन्न आयोगों को बड़ी संख्या में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रियाओं को पूरा करने का लक्ष्य दिया है, जिससे भविष्य में यह आंकड़ा और भी बड़ा होने की उम्मीद है।
नकल विरोधी कानून का प्रभाव
इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण प्रदेश में लागू किए गए सख्त ‘नकल विरोधी कानून’ को माना जा रहा है। फरवरी 2023 में धामी सरकार ने ‘उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय)’ कानून लागू कर पूरे देश के सामने एक कड़े संदेश दिया था। इस कानून ने नकल माफिया के उस नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया जो वर्षों से योग्य युवाओं के हक पर डाका डाल रहा था। इसके लागू होने के बाद से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता आई है। परिणामस्वरूप, अब परीक्षाएं बिना किसी बाधा और देरी के संपन्न हो रही हैं। पूर्व के वर्षों में जहां किसी एक भर्ती प्रक्रिया को पूरा होने में दो से तीन साल का समय लगता था, वहीं अब औसतन एक वर्ष के भीतर ही विज्ञापन से लेकर नियुक्ति तक की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
युवाओं के लिए कौशल विकास योजनाएं
सरकारी नौकरियों के अलावा, वर्तमान सरकार ने युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए भी अनूठी योजनाएं शुरू की हैं। 9 नवंबर 2022 को ‘मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना’ का शुभारंभ किया गया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के युवाओं को केवल स्थानीय बाजार तक सीमित न रखकर उन्हें वैश्विक मंच पर रोजगार के अवसर दिलाना है। इस योजना के तहत नर्सिंग, हॉस्पिटैलिटी और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में युवाओं को विशेष कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षित युवाओं को अब जर्मनी और जापान जैसे विकसित देशों में रोजगार के लिए भी भेजा जा रहा है। अब तक 154 युवाओं को इस योजना के तहत प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिनमें से 37 युवा सफलतापूर्वक जापान में रोजगार प्राप्त कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली स्पष्ट करती है कि उनकी सरकार का केंद्र ‘युवाओं’ और ‘रोजगार’ पर है। सरकार का मानना है कि प्रदेश का युवा अगर सशक्त और स्वावलंबी होगा, तभी उत्तराखंड एक आदर्श राज्य के रूप में विकसित हो सकेगा। भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार के साथ-साथ सरकार स्वरोजगार की योजनाओं पर भी उतना ही बल दे रही है, ताकि जो युवा अपनी इकाइयां स्थापित करना चाहते हैं, उन्हें बिना किसी परेशानी के वित्तीय और तकनीकी सहयोग मिल सके।
व्यक्ति की सीख और भविष्य की दिशा
अपने कार्यकाल की इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों में रिक्त पड़े पदों को भरना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे पारदर्शी भर्ती प्रणाली और सख्त कानून के जरिए संभव बनाया गया है। धामी के अनुसार, सरकार की प्राथमिकता केवल नौकरी देना ही नहीं है, बल्कि कौशल विकास के द्वारा युवाओं की क्षमता को इस तरह संवर्धित करना है कि वे दुनिया के किसी भी कोने में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकें। आने वाले समय में सरकार नई भर्ती परीक्षाओं के जरिए और भी अधिक युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी में है। साढ़े चार साल का यह सफर उत्तराखंड के युवाओं के लिए एक नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार लेकर आया है।
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सादर,
टीम नैनीताल समाचार
जया वर्मा
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