हाईकोर्ट का निर्णय: PTCUL के एमडी पी.सी. ध्यानी की नियुक्ति पर बड़ा हमला

Feb 19, 2026 - 08:30
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हाईकोर्ट का निर्णय: PTCUL के एमडी पी.सी. ध्यानी की नियुक्ति पर बड़ा हमला

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देहरादून, 18 फरवरी 2026।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय की नैनीताल स्थित खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए Power Transmission Corporation of Uttarakhand Limited (PTCUL) के प्रबंध निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। यह आदेश रिट याचिका (सर्विस बेंच) संख्या 295/2025 के अंतर्गत पारित किया गया, जिसे PTCUL के चीफ इंजीनियर लेवल-1 राजीव गुप्ता ने दायर किया था।

क्या थी समस्या?

10 सितंबर 2022 को प्रकाश चंद्र ध्यानी को PTCUL का अतिरिक्त प्रभार एमडी दिया गया था। याचिका में राजीव गुप्ता ने यह आरोप लगाया कि उनकी यह नियुक्ति उत्तराखंड चयन एवं नियुक्ति ऑफ मैनेजिंग डायरेक्टर एंड डायरेक्टर्स प्रक्रिया निर्धारण नियम 2021 (संशोधित) के नियम 9-ए का उल्लंघन करती है। इस नियम के अनुसार, एमडी पद के लिए इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री अनिवार्य है, और ध्यानी के पास यह आवश्यक योग्यता नहीं थी। इसके अलावा, वरिष्ठता की अनदेखी भी की गई थी।

कोर्ट का अहम फैसला

खंडपीठ ने न्यायमूर्ति आशीष नैथानी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की उपस्थिति में पाया कि एमडी पद के लिए इंजीनियरिंग डिग्री का होना अनिवार्य है और नियम 9-ए का उल्लंघन स्पष्ट है। इसलिए ध्यानी की नियुक्ति को अवैध घोषित कर दिया गया। साथ ही, कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि नियमित चयन प्रक्रिया पूरी होने तक नियमों के अनुसार एक अंतरिम वैकल्पिक व्यवस्था का संचालन करें।

निर्णय का प्रभाव

PTCUL में इंजीनियर्स में खुशी का माहौल है, क्योंकि कर्मचारियों का मानना है कि अब पदों पर योग्यता की अनदेखी नहीं की जा सकेगी। भविष्य की नियुक्तियों में पारदर्शिता और स्पष्टता बढ़ेंगी। राज्य सरकार को जल्द ही योग्य अंतरिम एमडी नियुक्त करना होगा ताकि कोई भी परियोजना प्रभावित न हो।

विशेष संपादकीय: व्यवस्था पर सवाल या नियमों की जीत?

उत्तराखंड उच्च न्यायालय का यह फैसला न केवल एक नियुक्ति के रद्द होने तक सीमित है, बल्कि यह सुसंगत शासन का एक संकेत भी है। PTCUL के प्रबंध निदेशक पद पर नियुक्ति को निरस्त करते हुए अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शैक्षणिक योग्यता और पात्रता की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब "अतिरिक्त प्रभार" जैसी कंडीशंस को भी गंभीरता से लिया जाएगा।

न्यायपालिका का संदेश

कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि नियम 9-ए के उल्लंघन को स्वीकार नहीं किया जा सकता। चयन प्रक्रिया लंबित होने से यह नहीं होता कि नियमों को नजरअंदाज किया जाए। न्यायपालिका ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रशासनिक सुविधा, विधिक बाध्यता से ऊपर नहीं हो सकती। यह निर्णय प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

मामले का महत्व

PTCUL केवल एक सरकारी निगम नहीं है; यह उत्तराखंड की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली का मूलाधार है। यहाँ कार्यरत एमडी का पद तकनीकी दिशा और महत्वपूर्ण निर्णयों का केंद्र होता है। इस पद पर बिना योग्यता के नियुक्ति का असर न केवल प्रशासनिक स्तर पर, बल्कि राज्य के विकास पर भी पड़ सकता है। क्या यह बदलावों की शुरुआत है? यह निर्णय दर्शाता है कि अब योग्यता और वरिष्ठता की अनदेखी नहीं की जा सकेगी।

सरकार को चुनौती

अब प्रदेश सरकार को चाहिए कि:

  • जल्द नियमित चयन प्रक्रिया पूरी की जाए
  • पारदर्शी और मेरिट-आधारित नियुक्तियाँ सुनिश्चित की जाएं
  • ऊर्जा क्षेत्र की स्थिरता और प्रोजेक्ट्स की निरंतरता बनाए रखी जाए

निष्कर्ष

PTCUL प्रकरण ने यह स्पष्ट किया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका अंतिम प्रहरी बनकर कार्य करती है। नियमों का संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना ही सही सुशासन की पहचान है। यह फैसला केवल एक पद की बहाली या निरस्तीकरण नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था को भी आईना दिखाने वाला प्रयास है।

कम शब्दों में कहें तो, हाईकोर्ट का यह निर्णय न्यायपालिका की भूमिका को मजबूती देता है और सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता को बढ़ावा देता है।

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Team Nainital Samachar, प्रियंका शर्मा

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