सीएम धामी का निर्देश: दिव्यांग और कमजोर वर्ग को घर-घर समाधान प्रदान करें
दिव्यांग व कमजोर वर्ग तक अधिकारी खुद पहुँचें, घर-घर समाधान सुनिश्चित करें: सीएम धामी
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 'जन-जन की सरकार' अभियान के तहत दिव्यांगों और कमजोर तबके के लाभार्थियों के लिए निर्णय लिया है कि अधिकारी खुद उनकी दरवाजे पर पहुँचेंगे ताकि समस्याओं का उचित समाधान किया जा सके।
जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंचने का महत्वपूर्ण कदम
देहरादून – उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 'जन-जन की सरकार' अभियान की समीक्षा के दौरान यह स्पष्ट किया कि अधिकारी दिव्यांगों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए घर-घर जाकर समाधान सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने इस अभियान को औपचारिकता में नहीं बदलने का निर्देश दिया और इसे एक प्रभावी 'गेम चेंजर' बनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस कार्यक्रम का लक्ष्य सिर्फ समस्याओं को सुनना नहीं है, बल्कि समाधान की प्रक्रिया को भी सशक्त करना है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नागरिकों को घर में ही सम्पूर्ण सहायता प्राप्त हो। अधिकारियों को आवश्यकतानुसार मौके पर ही समाधान निकालने का निर्देश दिया गया है।
प्रभावी शिविर का आयोजन
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिविरों का आयोजन उत्सव की तरह किया जाना चाहिए। स्थानीय भाषाओं—गढ़वाली और कुमाऊँनी में प्रचार प्रसार करना अनिवार्य होगा, जिससे लोग सहजता से जुड़ सकें। यह भी आवश्यक होगा कि समय सीमा और उत्तरदायित्व तय किए जाएँ ताकि लाभार्थियों को उचित जानकारी मिल सके।
सक्रिय भागीदारी का महत्व
सीएम ने महिला मंगल दलों, स्वयं सहायता समूहों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। समस्याओं की सूची बनाकर शासन के समक्ष पेश की जाएगी और साप्ताहिक रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाएगी। इस प्रकार, लोगों की समस्याएँ प्राथमिकता के आधार पर हल की जाएँगी।
फीडबैक और सुधार प्रक्रिया
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि अब तक 56,550 से अधिक लोग इस कार्यक्रम में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि यदि किसी शिविर से फीडबैक संतोषजनक नहीं आया तो वहाँ पुनः शिविर आयोजित किया जाएगा। इस प्रकार, यह अभियान निरंतरता के साथ प्रगति करेगा।
अधिकारियों का औचक निरीक्षण
मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि वह स्वयं शिविरों का औचक निरीक्षण करेंगे ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। उनका ध्यान विशेष रूप से उन मामलों पर होगा जहाँ धीमी गति से कार्य किया जा रहा है।
निष्कर्ष
सीएम धामी का यह फैसला उन नागरिकों के लिए राहत लेकर आया है जो स्वास्थ्य और अन्य सेवाओं से वंचित हैं। यह अभियान न केवल सरकार और जनता के बीच के संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि सामाजिक समावेशिता को भी बढ़ावा देगा। लगभग सभी वर्गों के नागरिकों को अब उनके दरवाजे पर ही समाधान प्राप्त होगा, जो कि 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' की भावना के अनुरूप है।
सिर्फ कानूनी रूप से सुविधाएँ प्रदान करने का प्रयास नहीं होगा, बल्कि लोगों की वास्तविक समस्याओं का समाधान भी किया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।
– Team Nainital Samachar
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