रोज़ी की तलाश में आया था पहाड़, बाघ के हमले में चली गई ज़िंदगी
रामनगर। रोज़ी–रोटी की उम्मीद लेकर उत्तराखंड आया एक मजदूर जंगल की क्रूर हकीकत का शिकार हो गया। नैनीताल जिले के रामनगर वन प्रभाग की कोटा रेंज में रविवार शाम बाघ के हमले में 30 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत हो गई। वह जल जीवन मिशन के तहत पेयजल लाइन बिछाने का काम कर रहा था।
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के जोहरिया गांव निवासी अभिमन्यु शाह पुत्र भगैलयू शाह कुछ माह पहले ही अपने साथियों के साथ रोज़गार की तलाश में रामनगर आया था। रविवार को वह कोटा रेंज के भलोन क्षेत्र में जंगल से सटे इलाके में काम कर रहा था। शाम करीब सवा छह बजे काम खत्म होने के बाद वह रोज़ की तरह अपने कमरे की ओर लौट रहा था, तभी घात लगाए बाघ ने उस पर हमला कर दिया और उसे जंगल की ओर खींच ले गया।
घटना के समय उसके साथ अन्य मजदूर भी मौजूद थे, लेकिन अचानक हुए हमले से वे कुछ कर नहीं सके। साथी मजदूरों की आंखों के सामने उनका साथी जंगल में गुम हो गया, और वे बेबस होकर मदद की गुहार लगाते रह गए।
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। रातभर चले सर्च अभियान के बाद युवक का शव बरामद किया गया। सुरक्षा कारणों से टीम को कई राउंड फायरिंग भी करनी पड़ी।
प्रभागीय वनाधिकारी ध्रुव मर्तोलिया ने बताया कि घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया गया है। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं और लोगों से जंगल की ओर न जाने की अपील की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर उन मजदूरों की असुरक्षित ज़िंदगी पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए जंगलों और जोखिम भरे इलाकों में काम करने को मजबूर हैं। अभिमन्यु की मौत ने उसके परिवार से एक बेटा, एक सहारा और एक सपना छीन लिया है।
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