मुख्यमंत्री धामी ने हल्द्वानी में कुमाऊं द्वार महोत्सव का भव्य शुभारंभ किया - हमारी संस्कृति की पहचान
मुख्यमंत्री धामी ने हल्द्वानी में कुमाऊं द्वार महोत्सव का भव्य शुभारंभ किया
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी के एमबी इंटर कॉलेज मैदान में पांच दिवसीय कुमाऊं द्वार महोत्सव का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि यह महोत्सव हमारी अस्मिता, पहचान और जड़ों से जुड़ने का अद्वितीय अवसर है।
कुमाऊं द्वार महोत्सव से युवा पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कुमाऊं द्वार महोत्सव का आयोजन न केवल संस्कृति का उत्सव है, बल्कि यह हमारे अस्मिता, पहचान और जड़ों से जुड़ाव का उत्सव भी है। उन्होंने यह भी बताया कि इस महोत्सव के जरिए युवा पीढ़ी को हमारी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ा जा रहा है, जो उनके लिए एक सार्थक प्रयास है।
लोक कलाकारों को मंच देने का अवसर
सीएम ने कहा कि कुमाऊं द्वार महोत्सव का मुख्य उद्देश्य लोक कलाकारों को एक मंच प्रदान करना और उन्हें सम्मानित करना है। उन्होंने इस बात की सराहना की कि इस महोत्सव में भाग लेने वाले स्थानीय कलाकार न केवल उत्तराखंड की संस्कृति को सहेजने का कार्य कर रहे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे प्रदर्शित कर रहे हैं।
संस्कृति और परंपरा के संरक्षण का प्रयास
मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर उल्लेख किया कि “तकनीकी युग में भी हमारी परंपराएं जीवित हैं, यह महोत्सव इसका प्रमाण है।” उन्होंने कहा कि शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।
ब्रह्मकमल टोपी - उत्तराखंड की पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 में प्रधानमंत्री द्वारा पहनी गई ब्रह्मकमल टोपी अब उत्तराखंड की पहचान बन चुकी है। यह टोपी हमारे संस्कृति का प्रतीक बनी हुई है, जिसने उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम
सीएम धामी ने महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए स्थानीय उत्पादों के स्टॉल का भी अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि “लखपति दीदी योजना” के तहत महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिल रही है।
आगामी गतिविधियाँ और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार राज्य की लोक भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए कई योजनाएँ बना रही है। इसमें लोक कलाकारों की सूची तैयार करना और कोरोना काल के दौरान आर्थिक सहायता देना शामिल है।
संपर्क में रहें
कुमाऊं द्वार महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित एवं संवर्धित करने के महत्वपूर्ण दिशाओं की ओर एक कदम है।
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कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और क्षेत्रीय जनता उपस्थित रहे, जो महोत्सव की शोभा बढ़ाने के लिए एकत्रित हुए थे।
सादर,
टीम नैनीताल समाचार
कविता वर्मा
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