भिक्षा से शिक्षा की ओर: जिला प्रशासन की स्वर्णिम पहल, इंटेंसिव केयर सेंटर के माध्यम से बच्चों का नया भविष्य
भिक्षा से शिक्षा की ओर: जिला प्रशासन की स्वर्णिम पहल, इंटेंसिव केयर सेंटर के माध्यम से बच्चों का नया भविष्य
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कम शब्दों में कहें तो, जिला प्रशासन ने भिक्षा से रेस्क्यू किए गए बच्चों के लिए एक आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर की स्थापना की है, जो उन्हें संगीत, योग और खेल के माध्यम से शिक्षा की ओर ले जाने का प्रयास कर रहा है।
देहरादून में 24 अक्टूबर 2025 को जिलाधिकारी सविन बसंल की अध्यक्षता में जिला बाल संरक्षण इकाई की त्रैमासिक बैठक हुई, जिसमें भिक्षावृत्ति के शिकार बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर चर्चा हुई।
बालगृहों में बच्चों के लिए विशेष शिविर
बैठक में यह जानकारी दी गई कि बालगृहों में निवासरत अनाथ बच्चों के लिए अनाथ प्रमाण पत्र, स्थायी निवास, आधार, आयुष्मान और राशन कार्ड के लिए शिविर लगाए जाएंगे। यह पहल बच्चों को सरकारी सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।
जिला प्रशासन की अनुशासन
जिलाधिकारी ने बताया कि वार्ड स्तरीय और ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समितियों को सक्रिय किया जाएगा। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बालगृहों में रह रहे बच्चों का रेंडमली सत्यापन किया जाए। इस प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों की एक संयुक्त टीम बनाई जाएगी।
स्वर्णिम पहल: इंटेंसिव केयर सेंटर
जिला प्रशासन के द्वारा रेस्क्यू किए गए बच्चों को शिक्षा और सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर खोला गया है। यह केंद्र भिक्षावृत्ति से बचाए गए बच्चों के लिए संगीत, योग और खेल की गतिविधियों का आयोजन करेगा। अब तक 82 बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाया गया है, जिसमें पहले चरण में 51 और दूसरे चरण में 31 बच्चे शामिल हैं।
इस केंद्र की लागत 1.5 करोड़ रुपये है, जिसका उद्देश्य बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। जिलाधिकारी ने बताया कि आगामी तीन महीनों में बाल संरक्षण समिति के समक्ष 136 बच्चों को पेश किया जाएगा और उनकी देखभाल की जाएगी।
सकारात्मक कदम: सुरक्षा और कल्याण
इस पहल के अंतर्गत, बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए आरबीएसके टीमों द्वारा 10 दिन के भीतर स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त, भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों की रेस्क्यू के लिए एक विशेष अंतरविभागीय टीम का गठन किया गया है, जिसके अंतर्गत विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं को जोड़ा जाएगा।
आवश्यक दिशा-निर्देश और कार्रवाई
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सभी बाल संरक्षण समितियों को सक्रिय करके, मिशन वात्सल्य की निर्देशों के अनुसार कार्यान्वित किया जाएगा। जिलाधिकारी ने इस संबंध में सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
आगे की योजना
जिलाधिकारी ने बालगृहों में निवासरत बच्चों के लिए अनाथ प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के निर्माण में आने वाली परेशानियों पर चर्चा की। सभी अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे समयबद्ध कार्रवाई करें। इसके अलावा, दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षक की व्यवस्था भी की जाएगी।
टीम Nainital Samachar
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