बलूनी फाउंडेशन का भव्य आयोजन: “समलौंण – संस्कृति और यादों को संजोए रखने का एक प्रयास” (Igass Mahautsav)
बलूनी फाउंडेशन का भव्य आयोजन: “समलौंण – संस्कृति और यादों को संजोए रखने का एक प्रयास”
कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में बलूनी फाउंडेशन ने “समलौंण – संस्कृति और यादों को संजोए रखने का एक प्रयास” (Igass Mahautsav) का विशेष आयोजन किया। यह आयोजन स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और उसकी महत्ता को दर्शाता है। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Nainital Samachar
कार्यक्रम का आयोजन 2 नवंबर को बनियावाला सामुदायिक भवन में महोत्सव मनाने के उद्देश्य से किया गया। यहाँ पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने इस अवसर पर अपने विचार साझा किए और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य उत्तराखंड की संस्कृति और यादों को संजोए रखना था, जिससे आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ा जा सके।
इस आयोजन में कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि धर्मपुर विधायक श्री विनोद चमोली थे, जबकि अन्य अतिथियों में बद्री-केदार समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और मुख्यमंत्री कार्यकारी अधिकारी प्रतिनिधि भूपेन्द्र बसेड़ा शामिल थे। इसके अलावा, जिला पंचायत अध्यक्ष पौड़ी गढ़वाल रचना बुटोला, DCDCU अध्यक्ष राकेश जोशी, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष आरती नेगी और ब्रह्मकमल फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. सुनीता बौडाई “विद्यार्थी” भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर, राज्य आंदोलनकारी आदरणीय खुशपाल सिंह परमार को बलूनी और ब्रह्मकमल फाउंडेशन की ओर से पुष्पगुच्छ, शाल और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा कि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को महत्व दें।
सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन विभिन्न नामी कलाकारों द्वारा किया गया। इसमें सौरव मैठाणी, कल्पना चौहान, रोहित चौहान, अभिनव रावत, और तुषार द्वारका डिमरी ने अपने शानदार प्रदर्शन से दर्शकों का मन मोह लिया। मंच संचालन का दायित्व आरजे गौरव भट्ट ने कुशलतापूर्वक निभाया।
बलूनी फाउंडेशन के ट्रस्टी मधुसूदन बलूनी, मनीष बलूनी, और जिला पंचायत सदस्य प्रमिला देवी बलूनी ने इस आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम के मुख्य प्रायोजक बलूनी कार्गो मूवर्स प्रा. लि. के दीपक बलूनी और खुशीराम थपलियाल के साथ रमेश चंद गौड़ (पार्षद, विद्या विहार) भी इस उत्सव का हिस्सा बने।
समारोह का समापन पारंपरिक भैलो खेल से किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों ने उत्तराखंडी परंपरा के अनुरूप दीपावली उत्सव का उल्लास पूर्वक आनंद लिया। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का एक प्रयास था, बल्कि यह समाज में भाईचारे और एकता के संदेश को भी प्रोत्साहित करता है।
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टीम नैनिताल समाचार
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