खटीमा: जंगल में फिर हाथी का शव मिलने से हड़कंप, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
खटीमा: जंगल में फिर हाथी का शव मिलने से हड़कंप, 20 दिन में दूसरी मौत
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कम शब्दों में कहें तो, खटीमा में जंगल में एक हाथी का शव मिलने से हड़कंप मच गया है, जबकि यह 20 दिनों में दूसरी मौत है। इस मामले में रेंजर और एसडीओ के बयानों में विरोधाभास ने संदेह को और बढ़ा दिया है।
खटीमा (उधम सिंह नगर) में तराई पूर्वी वन प्रभाग के किलपुरा रेंज में पश्चिमी किलपुरा कंपार्टमेंट संख्या 2 में एक हाथी का शव मिलने से वन विभाग में सनसनी फैल गई। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। यह जानकर हैरानी होती है कि बीस दिन पहले भी खटीमा रेंज के चकरपुर जंगल में एक 5 माह के हाथी के बच्चे का शव मिला था। लगातार दो घटनाओं ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अधिकारियों के बयानों में बड़ा विरोधाभास
एसडीओ संचिता वर्मा ने बताया कि मृत हाथी नर है और उसकी उम्र लगभग 4 साल है, तथा शव 2-4 दिन पुराना प्रतीत होता है। वहीं, रेंजर मनोज पांडे का दावा है कि हाथी की उम्र 10-11 साल है और उसकी मौत 2-3 दिन पहले हुई है। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजेंद्र राम के अनुसार, शव 10-11 दिन पुराना प्रतीत हो रहा था और इसके कई हिस्से सड़ चुके थे।
इन बयानों में विरोधाभास ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है।
क्या एक नहीं, बल्कि दो हाथियों की मौत हुई?
सूत्रों के अनुसार, डीएफओ को दो अलग-अलग स्थानों पर दो हाथियों के शव मिलने की सूचना मिली है—एक छोटा (4-5 वर्ष) और एक बड़ा (10-11 वर्ष)। दोनों के शवों के बीच की दूरी लगभग 4 किलोमीटर बताई जा रही है। लेकिन वन विभाग केवल एक हाथी के पोस्टमार्टम की पुष्टि कर रहा है, जिससे संदेह और गहरा हो गया है।
पोस्टमार्टम टीम की रिपोर्ट का इंतजार
पोस्टमार्टम का कार्य तीन डॉक्टरों के पैनल द्वारा किया गया:
- डॉ. राजेंद्र राम (खटीमा)
- डॉ. राहुल सती
- डॉ. हिमांशु
रिपोर्ट आने के बाद ही हाथी की मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट होगा। फिलहाल शव के विभिन्न अंग और दांत सुरक्षित मिले हैं।
20 दिन में दो हाथियों की मौत: वन विभाग पर गंभीर प्रश्न
इन दोनों हाथियों की मौत ने वन विभाग की कार्यशैली और निगरानी पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। पहले मिले हाथी के शव पर बाघ के हमले के निशान पाए गए थे, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या विभाग सही तरीके से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है।
स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों के बीच बढ़ते आक्रोश का भी यह मामला एक बड़ी वजह बन रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह clearly वन विभाग की लापरवाही और निगरानी की कमी को दर्शाता है।
फिलहाल, हाथियों की इस मामले पर स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर जनता का ध्यान आवश्यक हो गया है।
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सादर, टीम नैनिताल समाचार (समीना शर्मा)
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