क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल ऑफ इंडिया: देहरादून में तीसरे संस्करण का शुभारंभ

Dec 13, 2025 - 08:30
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क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल ऑफ इंडिया: देहरादून में तीसरे संस्करण का शुभारंभ
क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल ऑफ इंडिया: देहरादून में तीसरे संस्करण का शुभारंभ

क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल ऑफ इंडिया: देहरादून में तीसरे संस्करण का शुभारंभ

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कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह ने देहरादून में क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल ऑफ इंडिया का उद्घाटन किया, जिसमें अपराध, न्याय, और समाज पर महत्वपूर्ण चर्चा हो रही है।

देहरादून: क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल ऑफ इंडिया का तीसरा संस्करण आज हयात सेंट्रिक, देहरादून में आरंभ हुआ। इस उत्सव का लक्ष्य समाज में अपराध, न्याय और कानून के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श करना है। तीन दिनों तक चलने वाले इस समारोह में अद्भुत चर्चाएं और विचार-विमर्श होंगे।

कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध फिल्मकार केतन मेहता, पूर्व डीजीपी उत्तराखंड अशोक कुमार, फेस्टिवल डायरेक्टर आलोक लाल, और कई अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि "क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल" न्याय और समाज के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा, "अपराध एक ऐसी कहानी है जो हम सभी की है।" उन्होंने यह भी बताया कि यह उत्सव भगवान शिव के त्रिशूल के आशीर्वाद से सत्य और न्याय के पथ पर अग्रसर होने का प्रतीक है।

राज्यपाल ने आगे कहा, "नशे का उपयोग और साइबर अपराध आज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से हैं। समाज को एक एंटी-क्राइम वातावरण बनाने के लिए हम सबको सजग रहना होगा।" उन्होंने कहा कि देहरादून एकमात्र ऐसा शहर है जिसने अपराध को समझने और उससे सीखने का साहस दिखाया है।

फेस्टिवल के चेयरमैन अशोक कुमार ने कहा, "अगले तीन दिनों में हम नशा-निरोध, सड़क दुर्घटनाएँ, महिलाओं की सुरक्षा, और साइबर अपराध जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण चर्चाएँ करेंगे।" इस अवसर पर उन्होंने फेस्टिवल के महत्व और इसकी अनोखी शैली-आधारित आयोजन की सराहना की।

इसके बाद, पहली सत्र का शीर्षक था “मिर्च मसाला टू मांझी: केतन मेहता’स लेंस ऑन इनजस्टिस”, जिसमें केतन मेहता और पूर्व डीजी उत्तराखंड आलोक लाल ने फिल्म और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की। केतन मेहता ने अपराध के मानवीय संघर्ष को सिनेमा के माध्यम से दर्शाने की बात की।

उन्होंने कहा, "अपराध सिनेमा, साहित्य, और रंगमंच में हमेशा से एक आकर्षक विषय रहा है। हमारी फिल्में मानव संघर्ष और अपराध के अलग-अलग पहलुओं को उजागर करती हैं।"

फेस्टिवल के निदेशक आलोक लाल ने बताया कि यह दुनिया का एकमात्र उत्सव है जो अपराध विधा को समर्पित है। उन्होंने कहा, "हम सभी के अंदर नकारात्मक प्रवृत्तियाँ होती हैं, जिन्हें नियंत्रित करना बहुत आवश्यक है। यह उत्सव वास्तविक और काल्पनिक दोनों प्रकार के अपराधों पर चर्चा का एक ज्ञानवर्धक मंच है।"

शाम के दूसरे सत्र का शीर्षक “द एनफोर्सर – एन आईपीएस ऑफिसर’स वॉर ऑन क्राइम इन इंडिया’स बैडलैंड्स” रहा, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और लेखकों ने भाग लिया। इस चर्चा में भारत के अपराध परिदृश्य की वास्तविक चुनौतियों पर बातचीत की गई।

दून कल्चरल एंड लिटरेरी सोसाइटी (डीसीएलएस) द्वारा आयोजित यह फेस्टिवल एक बार फिर देहरादून को साहित्यिक और बौद्धिक संवाद का प्रमुख केंद्र स्थापित करता है। सभी के लिए खुला यह फेस्टिवल भूमि घोटालों, नशीले पदार्थों, महिला सुरक्षा, और साइबर धोखाधड़ी जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित करेगा।

फेस्टिवल के बारे में अधिक अपडेट के लिए, कृपया यहाँ क्लिक करें.

— टीम नैनीताल समाचार, प्रियंका शर्मा

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