उत्तराखंड में दिनदहाड़े गोलीबारी: प्रशासनिक टीम के सामने हुई फायरिंग, जिला पंचायत उपाध्यक्ष के भाई समेत दो घायल
उत्तराखंड में दिनदहाड़े गोलीबारी: प्रशासनिक टीम के सामने हुई फायरिंग, जिला पंचायत उपाध्यक्ष के भाई समेत दो घायल
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के हरिद्वार में एक बार फिर से जमीन विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया है, जहां प्रशासनिक टीम के सामने दिनदहाड़े फायरिंग की घटना ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी है।
हरिद्वार जिले के कनखल थाना क्षेत्र में स्थित ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी में बुधवार सुबह इस घटना ने सबको स्तंभित कर दिया। जब सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में जांच करने आई प्रशासनिक टीम के सामने ही फायरिंग की गई। इस घटना में जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चौहान के भाई सचिन चौहान को गंभीर रूप से गोली लगी। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर किया गया।
घायलों की स्थिति गंभीर
इस गोलीबारी की घटना में एक और ग्रामीण किशनपाल उर्फ नानू भी घायल हुए हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया। दोनों घायलों की स्थिति अत्यंत गंभीर बताई जा रही है।
जमीन विवाद क्या था?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह विवाद तहसील प्रशासन की टीम द्वारा सरकारी भूमि पर कब्जे की जांच के दौरान भड़का। घटना के समय दो पक्षों के बीच कहासुनी का आरंभ हुआ, जो देखते ही देखते हाथापाई और फिर गोलीबारी में बदल गया।
इस विवाद में अतुल चौहान और भाजयुमो के प्रदेश मंत्री तरुण चौहान शामिल थे, जिसके परिणामस्वरूप गोलियां चलने लगी। इस घटना ने पूरे गांव में दहशत फैला दी, जिससे भीड़ इधर-उधर भागने लगी। घटना स्थल पर कनखल थाना पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी तुरंत पहुंच गए थे। उन्होंने पूरे क्षेत्र को घेर लिया और मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें गठित की गई हैं। एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह ने कहा कि इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और आरोपियों को जल्द ही पकड़ा जाएगा।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष का बयान
जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चौहान ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि भूमि विवाद के संबंध में पहले भी जांच हो चुकी थी और उन्हें कोई आपत्ति नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि नापतोल के दौरान कुछ लोगों ने अचानक हमला किया और फायरिंग शुरू कर दी। चौहान ने यह भी बताया कि उन पर भी गोली चलाई गई, लेकिन वे बाल-बाल बच गए।
समापन टिप्पणी
यह घटना एक बार फिर से यह दर्शाती है कि उत्तराखंड में जमीन विवादों को सुलझाने की प्रक्रिया में खामी है, जिसका नतीजा कभी भी ऐसा खूनी संघर्ष बन सकता है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों में सतर्कता बरते और त्वरित कार्रवाई की जाए ताकि आगे कोई और दहशत पैदा न हो।
जानकारी के लिए और अपडेट्स के लिए नैनीताल समाचार पर अवश्य जाएं।
— टीम नैनीताल समाचार, प्रियंका शर्मा
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