उत्तराखंड: भालुओं के आतंक से पहाड़ी गांवों में दहशत, दिन-रात कर रहे पहरेदारी

Nov 30, 2025 - 08:30
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उत्तराखंड: भालुओं के आतंक से पहाड़ी गांवों में दहशत, दिन-रात कर रहे पहरेदारी
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भालुओं के द्वारा लगातार हो रहे हमलों से लोग दहशत में हैं और रात-रात भर पहरेदारी कर रहे हैं।

देहरादून/उत्तरकाशी। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इन दिनों जंगली जानवरों का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि लोगों का अपने घरों में चैन से सोना मुश्किल हो गया है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों, जैसे उत्तरकाशी, चमोली और लैंसडौन से भालुओं द्वारा आबादी वाले क्षेत्रों में घुसकर हमले करने की खबरें लगातार आ रही हैं। यह घटनाएं ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं। अब शाम होते ही गांव वाले अपने घरों में कैद होने पर मजबूर हो जाते हैं।

उत्तरकाशी जिले में भालू की सबसे भयावह स्थिति

उत्तरकाशी जिले के मोरी ब्लॉक स्थित गोविंद वन्य जीव विहार पार्क क्षेत्र में भालुओं का आतंक सबसे अधिक देखा जा रहा है। हाल ही में जखोल गांव में एक भालू बस्ती के बीच घुस आया। भालू ने कई रिहायशी घरों और छानियों के दरवाजे तोड़ डाले। इस घटना से पूरे गांव में अफरातफरी मच गई। ग्रामीणों ने बताया कि भालू की आक्रामकता बढ़ गई है, जिससे लोगों की जान को खतरा हो सकता है।

यमकेश्वर ब्लॉक में मवेशियों का शिकार

यमकेश्वर ब्लॉक के सार गांव का भी यही हाल है। यहां भालू एक सीरियल किलर की तरह मवेशियों को निशाना बना रहा है। पिछले दस दिनों में भालू ने तीन गाय और एक बछड़े को मार डाला। ग्राम प्रधान कृष्णा नेगी ने बताया कि भालू ने पशुपालक की गोशाला का दरवाजा तोड़कर गाय को मार डाला। यहाँ के पशुपालकों में भारी आक्रोश और डर का माहौल है।

चमोली जिले में भी भालू का आतंक

चमोली जिले में भी भालू का खौफ कम नहीं हो रहा है। दशोली विकासखंड के स्यूंण गांव में वन विभाग की गश्त के बावजूद भालू ने हमले किए। ग्रामीणों ने रात को पटाखे फोड़कर भालू को भगाने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही पटाखों का शोर थमा, भालू ने हमला बोल दिया और एक गोशाला में गाय को मार डाला। यहां भी लोग दहशत का सामना कर रहे हैं।

ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए उपाय

उत्तरकाशी जिले के अन्य गांवों जैसे बौंगा, रैथल और कैलसु में भी भालू दिखने से लोग चिंतित हैं। अनिल सिंह रावत और सुरजीत सिंह राणा के नेतृत्व में स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों से सुरक्षा की गुहार लगाई है। पार्क की उप निदेशक निधि सेमवाल और रेंजर अनुराग जोशी ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में वन कर्मियों की गश्त बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही नुकसान का आकलन कर मुआवजे के लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

इस स्थिति को देखते हुए सरकार और वन विभाग को तत्काल उपाय करने की आवश्यकता है ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भालुओं की मानव बस्ती में घुसपैठ को रोकने के उचित कदम उठाए जा सकें।

अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाइट Nainital Samachar पर जाएं।

Team Nainital Samachar

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