विशाल समाचार: AIIMS ऋषिकेश मशीन और दवा खरीद घोटाला - सीबीआई ने पूर्व निदेशक प्रो. रविकांत को बनाया आरोपी, पूरक चार्जशीट दाखिल
विशाल समाचार: AIIMS ऋषिकेश मशीन और दवा खरीद घोटाला
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कम शब्दों में कहें तो, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने AIIMS ऋषिकेश में हुए बहुचर्चित मशीन और दवा खरीद घोटाले में पूर्व निदेशक प्रो. रविकांत को आरोपी बनाया है। इसके साथ ही, पूरक चार्जशीट भी दाखिल की गई है।
देहरादून। AIIMS ऋषिकेश में उपजे स्वीपिंग मशीन और मेडिकल स्टोर में दवा खरीद के घोटाले ने एक नया मोड़ लिया है। सीबीआई ने प्रो. रविकांत को आरोपी ठहराते हुए इस मामले में पूरक चार्जशीट दाखिल की है। इसके अलावाई बिचौलिए महेंद्र सिंह उर्फ नन्हे के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
घोटाले का विवरण
सीबीआई की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि 2022 में AIIMS ऋषिकेश में मशीनों की खरीद और मेडिकल स्टोर आवंटन के दौरान टेंडर प्रक्रिया की खुली अनदेखी हुई और इस दौरान लगभग 4.41 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। जांच में यह बात भी सामने आई कि नियमों की अवहेलना करते हुए इस्तेमाल की हुई मशीनें खरीदी गईं।
स्वीपिंग मशीन की खरीद के लिए चार कंपनियों ने टेंडर प्रदान किए थे, जिनमें प्रतिष्ठित कंपनी यूरेका फोर्ब्स भी शामिल थी, लेकिन तकनीकी आधार पर उन्हें बाहर कर दिया गया। मशीन के लिए जारी टेंडर में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि मशीन तीन माह से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए, लेकिन जो मशीनें मिलीं, वे पहले से उपयोग में थीं।
बिचौलिए की मिलीभगत
इस घोटाले में बिचौलिए महेंद्र सिंह उर्फ नन्हे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उसे 5 लाख रुपये का भुगतान भी हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि प्रो. रविकांत ने टेंडर को स्वीकृति देने की मंजूरी दी थी, जिसके चलते पूरा सौदा आगे बढ़ा।
अन्य आरोपी और जांच प्रक्रिया
सीबीआई ने पहले ही कई अधिकारियों और प्रोफेसरों को आरोपी बनाया है, जिनमें माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर बलराम जी ओमर, एनाटॉमी विभाग के प्रोफेसर बृजेंद्र सिंह, और सहायक प्रोफेसर अनुभा अग्रवाल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, प्रशासनिक अधिकारी शशिकांत और लेखाधिकारी दीपक जोशी को भी आरोपित किया गया है। करार की भंगना की गई है, जिसके आधार पर त्रिवेणी सेवा फार्मेसी के मालिक को भी आरोपी बनाया गया है।
कैसे हुआ खुलासा
सीबीआई ने 3 से 7 फरवरी 2022 के बीच AIIMS ऋषिकेश में छापेमारी की, जिसके अंतर्गत अनियमितताओं की शिकायत पर जांच की गई। 22 अप्रैल 2022 को विस्तृत जांच में दस्तावेजों का निरीक्षण किया गया, जिससे 4.41 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हुआ।
कानूनी कार्रवाई का संकेत
पूर्क चार्जशीट के दाखिल होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह घोटाला निचले स्तर से लेकर उच्च प्रबंधन तक की मिलीभगत का परिणाम था। सीबीआई की कार्रवाई से AIIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में हुए भ्रष्टाचार पर कानूनी शिकंजा कसने की दिशा में संकेत मिल रहे हैं।
यह मामला न केवल चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा मुद्दा है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी दर्शाता है कि सभी सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और जिम्मेदारी बनी रहे।
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सादर, टीम नैनीताल समाचार - सिमा कुमारी
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