टाइगर के हमले से हाथी शावक की मौत से वन विभाग की लापरवाही उजागर - गहरा मुद्दा

Nov 11, 2025 - 08:30
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टाइगर के हमले से हाथी शावक की मौत से वन विभाग की लापरवाही उजागर - गहरा मुद्दा
टाइगर के हमले से हाथी शावक की मौत से वन विभाग की लापरवाही उजागर - गहरा मुद्दा

टाइगर के हमले से हाथी शावक की मौत से वन विभाग की लापरवाही उजागर - गहरा मुद्दा

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कम शब्दों में कहें तो, वन विभाग की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है, जिसमें चार माह के हाथी शावक की मौत हो गई है। यह घटना चार माह पुरानी है, शव सड़ने के बाद ग्रामीणों को जानकारी मिली और विभाग सोता रहा।

खटीमा (उद्यम सिंह नगर) सीमांत क्षेत्र में स्थित खटीमा वन रेंज के हाथी कॉरिडोर में हाल ही में एक बड़ी घटना हुई, जब टाइगर के हमले में चार महीने के नर हाथी शावक की मृत्यु हो गई। हैरान करने वाली बात है कि वन विभाग को इस मामले की जानकारी एक सप्ताह बाद मिली जब शव गलने सड़ने की स्थिति में पाया गया। इस घटना ने वन महकमे की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

हाथी शावक शव

घटना के तुरंत बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया था। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने शव का पोस्टमार्टम कराया, जिसमें दो पशु चिकित्सकों की टीम शामिल थी।

घटना का विस्तृत विवरण

यह घटना खटीमा वन रेंज की चकरपुर बीट के उत्तरी बनबसा कम्पार्ट में हुई है। चारा लेने आई कुछ महिलाएं वहां शव को देखकर दंग रह गईं। तेज दुर्गंध मिलने पर ग्रामीणों ने विभाग को सूचना दी, जिसके बाद अधिकारियों ने आनन-फानन में मामले की गंभीरता को समझा और मौके पर पहुंचे।

घटनास्थल

एसडीओ संचिता वर्मा ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना के बाद सोमवार सुबह वनकर्मी और चिकित्सक घटनास्थल पर पहुंचे। वहां पशु चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम किया और शव को वहीं दफना दिया। चिकित्सकों के अनुसार, यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और शावक का शव एक सप्ताह पुराना था।

शावक की मौत के कारण

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि शावक की मृत्यु एक सप्ताह पहले ही हुई थी। घटनास्थल पर गंभीर लड़ाई के निशान, टूटे पेड़ों की टहनियाँ और टाइगर के पंजों के निशान मिले। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि शावक को टाइगर ने हमला किया था, जो झुंड के साथ चल रहा था।

पोस्टमार्टम

स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि विभाग की सुस्ती और निगरानी की कमी के कारण यह घटना घटी। उनका कहना है कि अगर नियमित गश्त होती, तो शावक की मौत का पता समय पर चल सकता था, और शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।

वन विभाग की नीतियों पर सवाल

इस घटना ने वन विभाग की सिस्टमेटिक लापरवाही को एक बार फिर उजागर कर दिया है। यह एक गंभीर चिंता का विषय है कि संवेदनशील कॉरिडोर में अधिकारी या गश्ती टीम पर्याप्त रूप से सक्रिय नहीं थी। जब वन क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही होती है, तब उनकी देखरेख और सुरक्षा में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

स्थानीय लोगों का विरोध

भविष्य की कार्रवाई

विभाग ने अब क्षेत्र में वन्यजीव निगरानी बढ़ाने, कैमरा ट्रैप लगाने और गश्ती दलों की संख्या बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं। इस दौरान चकरपुर बीट इंचार्ज उत्तम सिंह राणा और अन्य कर्मी भी मौजुद थे। ज्ञात हो कि मृत शावक की मां कई बार अपने बच्चे के शव के पास लौटकर पहुंचती रही, जो इस पूरे प्रकरण को और भी मार्मिक बना देती है।

इस मामले में वन विभाग को गम्भीरता से कार्रवाई करनी होगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

एक बार फिर, यह घटना प्रदर्शित करती है कि हमें अपने पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति सजग रहना होगा।

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Team Nainital Samachar - संगीता शर्मा

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