चमोली में परीक्षा केन्द्रों का निरीक्षण: मुख्य शिक्षा अधिकारी की सतर्कता
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने लिया परीक्षा केन्द्रों में जाकर तैयारियों का जायजा
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कम शब्दों में कहें तो चमोली के मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने आज 21 फरवरी से प्रारंभ हो रही उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा के तहत तीन परीक्षा केन्द्रों का निरीक्षण किया।
के एस असवाल गौचर: चमोली जनपद के मुख्य शिक्षा अधिकारी ने परीक्षा की तैयारियों की समीक्षा के लिए राजकीय इंटर कॉलेज कुलसारी, राजकीय इंटर कॉलेज नारायणबगड़ और राजकीय इंटर कॉलेज भगवती के परीक्षा केन्द्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परीक्षा केंद्र प्रभारी, परीक्षा प्रभारी और कस्टोडियन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मुख्य शिक्षा अधिकारी सारस्वत ने निर्देशित किया कि शांति, निष्पक्षता और उच्च मानक की परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए। इस वर्ष, जनपद में कुल 101 मिश्रित परीक्षा केन्द्र और 6 एकल परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं, जिनमें अनुमानित 9224 विद्यार्थी परीक्षा देंगे।
इस बार की परीक्षाओं को नकलविहीन कराने के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी ने कक्ष निरीक्षकों की बैठक भी बुलाई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि नकलविहीन माहौल बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके पीछे प्रशासनिक दृष्टीकोण से एक महत्वपूर्ण संदेश है, जो इस बात का संकेत देता है कि शिक्षा व्यवस्था को कितनी गंभीरता से लिया जाता है।
इसी क्रम में, मुख्य शिक्षा अधिकारी ने खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय नारायणबगड़ का भी निरीक्षण किया। उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी को आदेशित किया कि किसी भी स्थिति में शिक्षकों के प्रकरण लम्बित नहीं होने चाहिए। यह निर्णय शिक्षा की गुणवत्ता और प्रणाली को सुधारने के उद्देश्य से लिया गया है।
इस निरीक्षण के दौरान, प्राथमिक विद्यालय भगवती और प्राथमिक विद्यालय राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय नारायणबगढ़ का भी अनुश्रवण किया गया। मुख्य शिक्षा अधिकारी के साथ खंड शिक्षा अधिकारी अनिनाथ, वरिष्ठ संकाय सदस्य डायट राजेंद्र प्रसाद मैखुरी, गोपाल प्रसाद कपरवाण, जिला समन्वयक समग्र शिक्षा हेम पुरोहित और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अनुज नेगी उपस्थित रहे।
इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा के क्षेत्र में उच्चतम मानक बनाए रखा जाए और परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों के भविष्य का निर्माण किया जाए। स्कूलों में हो रही इस प्रकार की गतिविधियाँ यह दर्शाती हैं कि शिक्षा अधिकारी कितनी सजगता से कार्य कर रहे हैं।
ये कदम आने वाली पीढ़ी को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही, यह भी आवश्यक है कि नागरिक भी शिक्षण संस्थानों के प्रति सजग रहें और इस प्रकार की पहलों में सहयोग करें।
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सादर,
टीम नैनिताल समाचार
श्रेया शर्मा
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