उत्तराखंड समान नागरिक संहिता: एक साल की सफलता और तकनीकी उत्कृष्टता

Jan 22, 2026 - 08:30
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उत्तराखंड समान नागरिक संहिता: एक साल की सफलता और तकनीकी उत्कृष्टता
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उत्तराखंड समान नागरिक संहिता: एक साल की सफलता और तकनीकी उत्कृष्टता

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की समान नागरिक संहिता (यूसीसी) ने एक साल में ही तकनीकी उत्कृष्टता का एक नया मानक स्थापित किया है। एआई सहायता के साथ उपलब्ध यह सेवा 23 भाषाओं में संचालित हो रही है, जिससे जनता की पहुंच बढ़ गई है।

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की सेवाएं न केवल अंग्रेजी में, बल्कि भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में सुलभ हैं। इसका उद्देश्य आम जनता को सुविधाएं प्रदान करना है, जिसमें आवेदक एआई की मदद से यूसीसी की प्रक्रिया को समझ सकते हैं और अपना पंजीकरण भी करवा सकते हैं।

यूसीसी की सरल प्रक्रिया और भाषा विविधता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यूसीसी के तहत विभिन्न सेवाओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और उपयोगकर्ता-मित्रवत रखा जाए। आईटीडीए ने इस दिशा में काफी कदम उठाए हैं, जिसके चलते यूसीसी की वेबसाइट को आठवीं अनुसूचना की 22 भाषाओं—जैसे असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू, सिंधी, बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली और मणिपुरी के साथ अंग्रेजी में भी तैयार किया गया है।

इससे आवेदक अपनी पसंदीदा भाषा में यूसीसी के नियम, प्रक्रिया और पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी ले सकते हैं। यह प्रक्रिया इतनी सहज है कि अब कोई भी व्यक्ति खड़ा होकर स्वयं अपना पंजीकरण कर सकता है। एआई का उपयोग भी इस कार्य को सरल बनाने के लिए किया जा रहा है।

सरकारी दृष्टिकोण और सफलता

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, *"हमारी सरकार पहले दिन से सरलीकरण से समाधान तक के मूलमंत्र लेकर चल रही है। समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि जनसामान्य को पंजीकरण में किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो। यूसीसी ने तकनीकी उत्कृष्टता का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है। इसी कारण पिछले एक साल में यूसीसी प्रक्रिया से संबंधित कोई भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।"* यह बात यूसीसी की सफलता को और भी स्पष्ट करती है।

अगले कदम और भविष्य की चुनौतियां

हालांकि, यूसीसी की सफलता के एक साल बाद, सरकार को चाहिए कि वह इस प्रक्रिया को और भी सुदृढ़ बनाए। अभी भी कई चुनौतियां हैं, जैसे जागरूकता बढ़ाने और तकनीकी सहायता को और बेहतर करने की। यूसीसी का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

यदि आप यूसीसी से संबंधित और अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट पर अवश्य जाएं: Nainital Samachar

— Team Nainital Samachar (सविता शर्मा)

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