हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाला: तीन अधिकारियों की जांच शुरू, मुख्यमंत्री धामी ने दी जीरो टॉलरेंस नीति की जानकारी
हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाला: तीन अधिकारियों की जांच शुरू, मुख्यमंत्री धामी ने दी जीरो टॉलरेंस नीति की जानकारी
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कम शब्दों में कहें तो, हरिद्वार नगर निगम में भूमि घोटाले से संबंधित तीन अधिकारियों की विभागीय जांच शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है।
हरिद्वार नगर निगम की ग्राम सराय में भूमि की खरीद में अनियमितताओं के चलते यह कार्रवाई की गई है। शासन ने सचिव आनंद श्रीवास्तव को अजयवीर सिंह के खिलाफ जांच अधिकारी नियुक्त किया है।
जांच की प्रक्रिया
गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी और उपजिलाधिकारी अजयवीर सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अजयवीर सिंह के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है, जिसमें उन्हें अपना पक्ष प्रस्तुत करने का मौका दिया गया था, लेकिन उन्होंने सभी आरोपों का खंडन किया है।
जांच रिपोर्ट का विवरण
गवर्नमेंट ने क्रूरता बढ़ाने हेतु डॉ. आनंद श्रीवास्तव (आईएएस) को अजयवीर सिंह के खिलाफ जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उन्हें एक माह के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
घोटाले का इतिहास
मामला 2024 के नगर निकाय चुनाव के दौरान का है, जब आचार संहिता लागू थी। हरिद्वार नगर निगम ने ग्राम सराय में 33 बीघा भूमि को 54 करोड़ रुपये में खरीदा था, जबकि इसकी वास्तविक मार्केट वैल्यू लगभग 13 करोड़ रुपये थी। यह भूमि निर्माण और विकास कार्यों के लिए भविष्य में उपयोग होना था, लेकिन अभी तक इसका कोई स्पष्ट उपयोग नहीं बताया गया है।
सीएम धामी की प्रतिक्रिया
सीएम धामी ने कहा है, “हम भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति को बढ़ावा देंगे। हमारी प्राथमिकता शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी है।” इस नीति के तहत कभी भी किसी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
आरोपियों की सूची
| अधिकारी का नाम | पद | स्थिति |
|---|---|---|
| कर्मेन्द्र सिंह | जिलाधिकारी और तत्कालीन प्रशासक नगर निगम हरिद्वार | निलंबित |
| वरुण चौधरी | तत्कालीन नगर आयुक्त, नगर निगम हरिद्वार | निलंबित |
| अजयवीर सिंह | तत्कालीन, उपजिलाधिकारी हरिद्वार | निलंबित |
इस मामले में और भी अधिकारियों को निलंबित किया गया है। बताया जा रहा है कि इस घोटाले की पृष्ठभूमि में कई प्रशासनिक अनियमितताएँ हैं।
अगले कदम
गवर्नमेंट ने दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है और यदि कोई अधिकारी इसमें लिप्त पाया गया तो उसे निलंबित किया जाएगा। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाने की शुरूआत की है।
भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए शासन को और भी कई उपाय करने होंगे ताकि व्यवस्था में सुधार आ सके। हमें उम्मीद है कि इस मामले के नतीजे पारदर्शी होंगे और जनहित में उचित कार्रवाई की जाएगी।
फिर से, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि इस घोटाले के मूलभूत मुद्दों को उजागर करने के लिए किसी भी स्तर पर बिना किसी मतभेद के कार्रवाई की जाएगी।
संबंधित अधिक जानकारी के लिए, कृपया हमें यहाँ विजिट करें।
इस रिपोर्ट को प्रस्तुत किया है, जूही मिश्रा, Team Nainital Samachar
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