लोक भवन में नशा मुक्त समाज के लिए ‘एक प्रयास, नशा मुक्त हो समाज’ कार्यक्रम का आयोजन

Sep 10, 2026 - 08:30
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लोक भवन में नशा मुक्त समाज के लिए ‘एक प्रयास, नशा मुक्त हो समाज’ कार्यक्रम का आयोजन
लोक भवन में नशा मुक्त समाज के लिए ‘एक प्रयास, नशा मुक्त हो समाज’ कार्यक्रम का आयोजन

लोक भवन में नशा मुक्त समाज के लिए ‘एक प्रयास, नशा मुक्त हो समाज’ कार्यक्रम का आयोजन

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कम शब्दों में कहें तो, लोक भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में नशे के दुष्प्रभावों और रोकथाम के उपायों पर चर्चा की गई। राज्यपाल ने समाज में सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।

नशा मुक्ति के प्रति सजगता लाने व समाज की एकजुटता के लिए उत्तराखंड के देहरादून में ‘एक प्रयास, नशा मुक्त हो समाज’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह कार्यक्रम 09 सितम्बर, 2026 को लोक भवन में संपन्न हुआ। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। कार्यक्रम का विकसीत लक्ष्य युवाओं और विद्यार्थियों के बीच नशे की समस्याओं के प्रति जागरूकता फैलाना और सामुदायिक भागीदारी को सुनिश्चित करना था। कार्यक्रम का उद्घाटन

इस अवसर पर “नशा मुक्त उत्तराखंड हेतु देहरादून घोषणा-पत्र” भी जारी किया गया। इस दस्तावेज़ में सामाजिक संगठनों, परिवारों और युवा पीढ़ी के योगदान को संशोधित कर नशा मुक्त उत्तराखंड बनाने के लिए ठोस कदम उठाने पर बल दिया गया है।

घोषणा-पत्र में परिवारों का नशे से प्रभावित लोगों के उपचार और पुनर्वास में योगदान, नशे के दुष्प्रभावों से बचाव, और समाज की बीच बढ़ती भागीदारी के लिए दस प्रमुख संकल्प शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य सभी वर्गों के लोगों को एकजुट कर उत्तराखंड को नशा मुक्त बनाना है।

कार्यक्रम की विशेष चर्चा

इस कार्यक्रम के दौरान ‘व्यसन मुक्त, सशक्त शैक्षणिक संस्थानों का निर्माण’ विषय पर विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा का संचालन श्री अनूप नौटियाल ने किया, जिसमें दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, सीआईएमएस ग्रुप ऑफ कॉलेज एवं सजग इंडिया के अध्यक्ष श्री ललित जोशी, और अन्य विशेषज्ञों ने भाग लिया।

विशेषज्ञों ने नशा विरोधी वातावरण को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों को काउंसलिंग प्रदान करने के कार्यक्रमों पर विचार किए। इसके पश्चात ‘नशा मुक्त समाज-समुदाय आधारित’ विषय पर दूसरी परिचर्चा का आयोजन भी हुआ, जिसका संचालन श्री अनुपम त्रिवेदी ने किया। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों और मनोवैज्ञानिकों ने नशे की रोकथाम में सभी जातियों, समुदायों और शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की। विशेषज्ञों की चर्चा

राज्यपाल ने कहा कि नशा एक गंभीर चुनौती है, जो न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है बल्कि पूरे समाज की प्रगति में भी रोड़ा बनता है। उन्होंने इस मुद्दे को जन आंदोलन का रूप देने पर जोर दिया और कहा कि इसमें शैक्षणिक संस्थानों और समुदाय की सहयोगिता आवश्यक है।

उन्होंने युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और राष्ट्र निर्माण की क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि इसे सकारात्मक दिशाओं में प्रोत्साहित करना होगा। साथ ही नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराने का संदेश देना भी महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में आयोजित विविध सत्र

कार्यक्रम की शुरुआत अपर सचिव, उच्च शिक्षा श्री मनुज गोयल के स्वागत उद्बोधन से हुई। नशे के दुष्प्रभावों को समझाने के लिए दून विश्वविद्यालय के थिएटर विभाग द्वारा एक नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया गया। इस नाटक के माध्यम से युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए प्रश्न-उत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने नशे की समस्या, मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास से संबंधित प्रश्न पूछे। इस दौरान राज्यपाल ने ‘नशा मुक्त नव-निर्माण’ शीर्षक से डॉ. रोहित रस्तोगी की पुस्तक का विमोचन किया।

कार्यक्रम में उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र भसीन, सचिव श्री शैलेश बगोली, और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे नशा मुक्त उत्तराखंड की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया है।

इस आयोजनों की आवश्यकता और प्रभाव को देखते हुए अभी भी समाज में और जागरूकता फैलाना और सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।

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