जंगल की काली हकीकत: बाघ के हमले में मजदूर की गई जान

Jan 5, 2026 - 08:30
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जंगल की काली हकीकत: बाघ के हमले में मजदूर की गई जान
जंगल की काली हकीकत: बाघ के हमले में मजदूर की गई जान

जंगल की काली हकीकत: बाघ के हमले में मजदूर की गई जान

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में रोज़ी की तलाश में आए एक मजदूर की बाघ के हमले में जान चली गई। यह घटना जंगल में काम कर रहे अभिमन्यु शाह के साथ हुई, जिसने परिवार को अनाथ छोड़ दिया।

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रामनगर। उत्तराखंड में रोज़ी–रोटी की उम्मीद लेकर आए एक मजदूर ने जंगल की क्रूरता का सामना किया और इस वजह से उसकी ज़िंदगी समाप्त हो गई। नैनीताल जिले के रामनगर वन प्रभाग की कोटा रेंज में रविवार की शाम बाघ के हमले में 30 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत हो गई। वह जल जीवन मिशन के तहत पेयजल लाइन बिछाने का काम कर रहा था।

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के जोहरिया गांव के निवासी अभिमन्यु शाह, जो कि भगैलयू शाह के पुत्र हैं, कुछ माह पहले ही अपने साथियों के साथ रोजगार की तलाश में रामनगर आए थे। रविवार को वह कोटा रेंज के भलोन क्षेत्र में जंगल से सटे इलाके में काम कर रहे थे। शाम लगभग साढ़े छह बजे, काम खत्म होने के बाद वह नियमित रूप से अपने कमरे की ओर लौट रहे थे, तभी अचानक घात लगाए बाघ ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें जंगल की ओर खींच ले गया।

इस घटना के समय अभिमन्यु के साथ अन्य मजदूर भी मौजूद थे, लेकिन वे बाघ के अचानक हमले से कुछ नहीं कर सके। साथी मजदूरों की आंखों के सामने उनका साथी जंगल में ग़ायब हो गया, और उन्होंने सहायता के लिए चीख-पुकार की।

स्थानीय वन विभाग की टीम को सूचना मिलने के बाद तुरंत मौके पर पहुंची। रातभर चले सर्च अभियान के चलते युवक का शव बरामद किया गया। सुरक्षा कारणों से, टीम को कई राउंड फायरिंग भी करनी पड़ी।

प्रभागीय वनाधिकारी ध्रुव मर्तोलिया ने कहा कि घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया गया है। बाघ की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं और स्थानीय निवासियों से जंगल की ओर न जाने की अपील की जा रही है।

इस घटना ने एक बार फिर उन मजदूरों की असुरक्षित ज़िंदगी पर सवाल उठाए हैं, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए जंगलों और जोखिम भरे इलाकों में काम करने को मजबूर हैं। अभिमन्यु की मौत ने उसके परिवार को न केवल एक बेटे बल्कि सहारे और सपने से भी वंचित कर दिया है।

ऐसी घटनाएँ इस बात की ओर इशारा करती हैं कि मजदूरों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। न केवल उनके काम की स्थितियों को बेहतर बनाना आवश्यक है, बल्कि ऐसे खतरों से बचाने के लिए भी उपाय करने जरूरी हैं। इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या राज्य और केंद्र सरकारें इन मुद्दों को गंभीरता से लेंगी या मजदूरों की ज़िंदगी हमेशा इसी तरह खतरे में रहेगी?

इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ जब तक रुक नहीं जाएंगी, तब तक हमें इस विषय में गहराई से चिंतन की आवश्यकता है।

इसके अलावा, हम सभी से अपील है कि इस तरह की घटनाओं से सबक लेते हुए सावधानी बरतें। जो लोग प्राकृतिक संसाधनों के आसपास काम कर रहे हैं, उन्हें हमेशा सतर्क रहना चाहिए।

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सादर,
Team Nainital Samachar
नंदिनी मेहता

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