चित्रा कालरा को मिली नई जिंदगी; पिता की मृत्यु के बाद शिक्षा में आई मदद, डीएम ने दिलाया बी-कॉम दाखिला

Nov 19, 2025 - 08:30
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चित्रा कालरा को मिली नई जिंदगी; पिता की मृत्यु के बाद शिक्षा में आई मदद, डीएम ने दिलाया बी-कॉम दाखिला
चित्रा कालरा को मिली नई जिंदगी; पिता की मृत्यु के बाद शिक्षा में आई मदद, डीएम ने दिलाया बी-कॉम दाखिला

पिता की मृत्यु के बाद शिक्षा का संकट: चित्रा को मिली राहत

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कम शब्दों में कहें तो, चित्रा कालरा को शिक्षा में गंभीर संकट का सामना करना पड़ा था, लेकिन जिलाधिकारी सविन बंसल ने उनकी मदद की और उन्हें प्रतिष्ठित संस्थान में स्नातक बी-कॉम आनर्स में दाखिला दिलाया।

चित्रा की पढ़ाई, आवाजाही, और किताबों का समस्त खर्चा अब जिला प्रशासन और संस्थान द्वारा वहन किया जाएगा। हाल ही में, चित्रा और उनकी बहन हेतल ने जिलाधिकारी कार्यालय में अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि उनके पिता की मृत्यु के कारण उनकी शिक्षा बाधित हो गई थी, जिससे वह फीस देने में असमर्थ थीं।

चिंता और गुहार का आलम

स्वर्गीय पिता का लिए गए ऋण का भुगतान न कर पाने के कारण चित्रा और हेतल ने डीएम से गुहार लगाई कि उनकी पढ़ाई और मकान बचाने का रास्ता निकाला जाए। जिलाधिकारी ने तात्कालिक निर्णय लिया और चित्रा को आज ही प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिले के लिए भेजा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि चित्रा की शिक्षा और जरूरतों का समस्त खर्च उठाया जाएगा।

जिला प्रशासन की नई कार्यशैली

जिले में प्रशासन की कार्यशैली में बदलाव आ रहा है। शिक्षा, रोजगार और ऋण माफी जैसे मामलों को सुलझाने के लिए जिले के प्रशासन ने नए तरीके अपनाए हैं। चित्रा और हेतल का मामला इस बात का स्पष्ट उदाहरण है।

समस्या का सही समाधान

चित्रा और हेतल ने जिलाधिकारी को बताया कि उनके पिता द्वारा लिया गया बैंक ऋण अब उन्हें भारी परेशानी में डाल रहा है। पिता की मौत के बाद बैंक द्वारा दिए जा रहे दबाव के कारण दोनों बहनों को लगातार चिंता हो रही थी। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि ऋण के बीमा की स्थिति की रिपोर्ट तैयार की जाए।

सार्वजनिक सेवाओं की भूमिका

जिलाधिकारी सविन बंसल स्वयं इन मामलों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उनकी नई नीति में, सभी जनहित से संबंधित मामलों का समयबद्ध समाधान किया जा रहा है। यह जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

चित्रा ने आज अपने सपनों को फिर से जीवित करने की एक नई राह पाई है। उनके लिए यह सिर्फ शिक्षा का मामला नहीं है, बल्कि उनके भविष्य का निर्माण भी है। यह घटनाक्रम न केवल चित्रा के लिए, बल्कि उनके परिवार के लिए भी एक नई उम्मीद लेकर आया है।

जिलाधिकारी कार्यालय का यह कृत्य दर्शाता है कि कैसे सरकारी सहायता से लोगों की जिंदगी में परिवर्तन लाया जा सकता है। इससे हमें यह भी सीखने को मिलता है कि संवेदनशीलता और तत्परता के साथ ही किसी भी समस्या का समाधान किया जा सकता है।

अंत में, हम उम्मीद करते हैं कि चित्रा और उनके परिवार को आगे बेहतर अवसर मिले।

आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है। इस कहानी के जरिए यह साफ हो जाता है कि मानवता का अस्तित्व हमारे बीच कितना महान है।

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धन्यवाद,
टीम नैनिटल समाचार

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