Uttarakhand: अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग तेज, कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया गया
अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की तेज मांग
देहरादून। उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इस संदर्भ में कांग्रेस पार्टी ने बृहस्पतिवार को एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने न्याय की मांग को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया। ज्ञातव्य है कि अंकिता भंडारी का शव September 2022 में बरामद हुआ था, जो इस मामले को और भी गरमाता है।
पत्रकार वार्ता के दौरान, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि "अंकिता को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलना चाहिए और हम सभी को एकजुट होकर इस घटना के खिलाफ खड़ा होना है।" वार्ता के बाद, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लोकभवन की ओर बढ़ते हुए प्रदर्शन किया, जहाँ पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका। पुलिस की कार्रवाई के चलते कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत शामिल हैं।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की रणनीति
हिरासत में लिए जाने के बाद, हरीश रावत ने कहा कि, "पुलिस को हिरासत में लेने का अधिकार है और उसने जो कार्रवाई की है, वह उचित है। आगे की रणनीति हम पुलिस स्टेशन या जेल से ही तय करेंगे।" कांग्रेस नेता इस मामले में न्याय की मांग को लेकर अपने आंदोलन को जारी रखेंगे।
दिल्ली में भी प्रदर्शन
दिल्ली के इंडिया गेट पर भी अंकिता भंडारी के न्याय हेतु रातभर प्रदर्शन चल रहा था। पुलिस के अनुसार, इस प्रदर्शन में शामिल अंकिता के माता-पिता, विपक्षी नेता, और कई प्रदर्शनकारियों को बृहस्पतिवार को तड़के करीब 3:45 बजे हिरासत में लिया गया और तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
अंकिता के माता-पिता को लगभग दो घंटे के बाद रिहा किया गया। हिरासत से बाहर आने के बाद, अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि "यदि हमारी बेटी को न्याय नहीं मिला, तो हम देशभर में आंदोलन करेंगे," जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस मामले को लेकर सार्वजनिक असहमति और भी बढ़ सकती है।
राजनीतिक नियुक्तियों से जुड़ी चिंताएं
इस बीच, दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति ने भी विवाद खड़ा कर दिया है। कुछ संगठनों ने उनके नाम को लेकर सवाल उठाए हैं, खासकर जब उनका संबंध कथित वीआईपी व्यक्तियों से जुड़ा है।
बृहस्पतिवार को श्रीनगर में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के बिरला परिसर में इससे संबंधित विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने दुष्यंत कुमार गौतम का पुतला जलाया और उनके राज्यपाल के रूप में नियुक्ति की रद्द करने की मांग की।
न्याय की मांग का व्यापक असर
अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह अन्य राज्यों में भी सुनी जा रही है। कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठन लगातार इस मामले में अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। इसके साथ ही, इस प्रकरण के विभिन्न आरोपों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर बहस जारी है।
निष्कर्ष
कम शब्दों में कहें तो, अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग को लेकर जारी आंदोलन अब उत्तराखंड की सीमाओं को पार कर चुका है। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और जनता की प्रतिक्रियाएँ इस बात का संकेत देती हैं कि यह मामला कहीं ज्यादा गहरा है। आगे क्या होता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
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सादर, टीम नैनिताल समाचार - नेहा कुमारी
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