दीपावली पर स्वदेशी एलईडी लड़ियों और मिलेट्स उत्पादों की धूम, महिलाओं ने किया लाखों का कारोबार

Nov 5, 2026 - 08:30
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दीपावली पर स्वदेशी एलईडी लड़ियों और मिलेट्स उत्पादों की धूम, महिलाओं ने किया लाखों का कारोबार

1.30 लाख एलईडी लड़ियों का मिला ऑर्डर, 1.05 लाख की आपूर्ति पूरी; मिलेट्स गिफ्ट हैंपर बेचकर स्वाभिमान क्लस्टर ने कमाए 18 लाख रुपये से अधिक

देहरादून। दीपावली के पर्व पर देहरादून की ग्रामीण महिलाएं स्वदेशी उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं कहीं स्वदेशी हिलान्स एलईडी लड़ियां तैयार कर घरों को रोशन कर रही हैं, तो कहीं पहाड़ी मिलेट्स से बने आकर्षक गिफ्ट हैंपर के जरिए बाजार में अपनी पहचान बना रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को आगे बढ़ाते हुए विकासनगर के सोरना डोभरी स्थित स्वाभिमान महिला क्लस्टर की महिलाओं ने दीपावली के अवसर पर मिलेट्स आधारित उत्पादों के 2,000 से अधिक गिफ्ट हैंपर बेचकर 18 लाख रुपये से अधिक का कारोबार किया है।

इन गिफ्ट हैंपर में हैंडमेड कुकीज, रागी हनी बिस्किट, फ्रूट एंड नट्स चॉकलेट, गुड़ मिल्क बिस्किट, रागी चॉकलेट, मंडुआ केक और मंडुआ चॉकलेट जैसे स्थानीय उत्पाद शामिल हैं। इनकी मांग देहरादून के साथ उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल तक बढ़ रही है। बेकरी यूनिट के माध्यम से गांव की आठ अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है।

 

स्वाभिमान बेकरी यूनिट की सदस्य कल्पना बिष्ट के अनुसार, करीब दो वर्ष पहले ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (रीप) के सहयोग से बेकरी यूनिट की शुरुआत की गई थी। सरकारी आयोजनों में स्टॉल लगाने के अवसर मिलने के साथ इस वर्ष दीपावली पर कई बड़े संस्थानों से गिफ्ट हैंपर के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं।

वहीं, रायपुर विकासखंड के सोडा सरोली ग्रोथ सेंटर में दिव्य ज्योति क्लस्टर की महिलाएं मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के तहत स्वदेशी हिलान्स एलईडी लड़ियों का निर्माण कर रही हैं। क्लस्टर को कुल 1 लाख 30 हजार एलईडी लड़ियां तैयार करने का ऑर्डर मिला है। सोडा सरोली और थानों न्याय पंचायत से जुड़ी करीब 350 महिलाएं घरों पर ही इनका निर्माण कर अपनी आजीविका मजबूत कर रही हैं।

क्लस्टर अध्यक्ष ममता कोठियाल ने बताया कि अब तक 1 लाख 5 हजार एलईडी लड़ियों की आपूर्ति पूरी की जा चुकी है, जबकि शेष 25 हजार लड़ियों का निर्माण जारी है। बाजार में एक पैकेट की कीमत करीब 120 रुपये है और निर्माण लागत 70 से 80 रुपये तक आती है। प्रत्येक महिला को 100 पैकेट तैयार करने पर लगभग 700 रुपये की आय प्राप्त हो रही है।

सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि दोनों क्लस्टर की महिलाएं दीपावली के अवसर पर उत्साहपूर्वक आजीविका संवर्धन के कार्यों में जुटी हैं। स्थानीय उत्पादों की बढ़ती मांग से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

ग्रामीण महिलाओं की यह पहल न केवल स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दे रही है, बल्कि स्थानीय संसाधनों के उपयोग, महिला उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है।

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